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राम-सीता विवाह का मनोहारी वर्णन किया।

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बिसौली। नगर के राधा कृष्ण मंदिर में चल रही श्री राम कथा में मंगलवार को कथा व्यास आचार्य देशपाल भारद्वाज ने राम-सीता विवाह का मनोहारी वर्णन किया।
कथा वाचक भारद्वाज ने कहा कि एक बार मे शिव जी के धनुष को उठा लिया। राजा जनक ने यह देखकर स्वयंवर आयोजित करने की घोषणा कर दी। जो भी शिव के विशाल धनुष पर प्रत्यंचा से चढ़ाएगा उसी के साथ वह अपनी पुत्री सीता का विवाह करेंगे। गुरु विश्वामित्र राम लक्ष्मण को साथ लेकर जनकपुर में आयोजित स्वयंवर में चले जाते हैं। जहां एक वाटिका में सीता माता भगवान श्री राम को मन ही मन अपने पति के रूप में चुन लेती हैं। स्वयंवर में प्रभु राम को देखकर जनकपुर बासियो सुंदरता का वर्णन करने लगे। सरस्वती माता भी भगवान श्रीराम की सुंदरता का वर्णन करने में असमर्थ थी। उन्होंने बताया कि स्वयंवर में भाग लेने देश-विदेश के शक्तिशाली राजा पहुंचते हैं, जो धनुष को हिला भी नहीं पाते हैं। गुरु विश्वामित्र भगवान श्री राम को धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की आज्ञा देते हैं। भगवान श्री राम धनुष को उठा लेते हैं। प्रत्यंचा चढ़ाते हुए शिव जी का धनुष टूट जाता है, जहां बलशाली राजा अपना अपमान समझकर वहां से खिसक जाते हैं। सूचना मिलने पर राजा दशरथ बारात लेकर पहुंच जाते हैं जहां सीताराम विवाह धूमधाम से संपन्न होता है। इस मौके पर डॉ. प्रवीण शर्मा, सूर्यकांत पाठक, अशोक शर्मा, मधु शर्मा, विपनेश शर्मा, सीमा, नीलम शंखधार, इंदु शर्मा, सोनी पाठक, रुचि सिंह, आदि भक्तगण मौजूद रहे।


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