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एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

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*एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपा ज्ञापन*
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👉 *कहा कार्यवाही नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन*

*लखनऊ*। विगत दिनों लखनऊ विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के शिक्षक रविकांत चंदन ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा कि मुस्कान और सोनम रघुवंशी जैसी महिलाएं संघी विचार की उपज हैं। आज महिलाएं अगर अपने पतियों की हत्या करवा रही हैं तो इसके लिए सिर्फ और सिर्फ आर एस एस की मानसिकता जिम्मेदार है , जिसपर एबीवीपी लखनऊ विश्वविद्यालय इकाई ने लखनऊ विश्वविद्यालय को ज्ञापन दिया लखनऊ महानगर सहमंत्री जतिन शुक्ला ने कहा कि लगातार लखनऊ विश्वविद्यालय के कई प्रोफेसर ऐसी नफरत भरी बाते अपने सोशल मीडियो पर पोस्ट कर रहे हैं।

जिसपर एबीवीपी ने पूर्व में भी कार्यवाही की मांग की थी और एफ आई आर भी दर्ज कराई थी रविकांत चंदन का ये कोई नया कारनामा नहीं है बल्कि इससे पूर्व काशी विश्वनाथ मंदिर पर अभद्र टिप्पणी की थी जिसमें ईन्होंने कहा था कि जब गंगा स्नान के वक्त महिलाएं काशी विश्वनाथ में आरती करने जाती थीं तब गर्भ गृह के अंदर वहां के पुजारी उनके साथ व्यभिचार करते थे जिसपर आहत होकर औरंगजेब ने ज्ञानवापी मंदिर तोड़ मस्जिद बनवा दिया था।

इसके साथ साथ लगातार ये नफरत भरी बातें क्लास में भी करते रहते हैं हैं और अब जिस विश्वविद्यालय ने भाऊराव देवरस जैसे संघ और देश के महान लोगों को शिक्षा दी आज वहां के प्रो का संघ पर ऐसी नीच बयानबाजी बहुत निंदनीय है संघ बिना किसी प्रचार के राष्ट्र पुनर्निर्माण के विचार के साथ देश सेवा में अपनी महती भूमिका निभाता रहा है रविकांत चंदन को माफी मांगनी चाहिए और विश्वविद्यालय प्रशासन को इनपर तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए।

लखनऊ विश्वविद्यालय इकाई उपाध्यक्ष नीतीश सिंह ने कहा कि कोरोना काल हो या कोई प्राकृतिक आपदा संघ के स्वयंसेवकों ने बिना प्रचार के निस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया है आज भारत में लाखों लोग संघ की प्रेरणा से राष्ट्र निर्माण के कार्य में जुटे हैं , ऐसे संगठन को हिंसा और नफरत का प्रतीक कहना न केवल संघ के समर्पित स्वयंसेवकों का अपमान है , बल्कि राष्ट्र की आत्मा का भी अपमान है। इकाई सहमंत्री साक्षी सिंह ने कहा पिछली बार भी इन्होंने महिलाओं को अपनी बयानबाजी का विषय बनाया था और इस बार भी महिलाओं को विषय बनाकर संघ को निशाना बनाया है।

ये न केवल संघ का अपमान है बल्कि महिलाओं का भी अपमान है आगे उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का कार्य होता है छात्रों के विचारों को उचित दिशा देना , लेकिन डॉ चंदन निरंतर छात्रों और समाज के बीच वैचारिक जहर फैलाने का कार्य रहे हैं ऐसे बयान न केवल संस्था की छवि को धूमिल करते हैं , अपितु विद्यार्थियों के मन में भ्रम और द्वेष भी उत्पन्न करते हैं यह शैक्षणिक संस्था के गरिमामय वातावरण के लिए अत्यन्त हानिकारक है।

महानगर सह मंत्री जतिन ने प्रशासन से मांग रखते हुए कहा प्रशासन को इस विषय पर तुरंत संज्ञान लेते हुए एक निष्पक्ष जांच समिति गठित की जाए एवं जांच पूरी होने तक डॉ रविकांत चंदन को निलंबित किया जाए , दोष सिद्ध होने की स्थिति में उन्हें लखनऊ विश्वविद्यालय से निष्कासित किया जाए तथा भविष्य में इस प्रकार की अनुशासन हीनता की पुनरावृत्ति रोकने हेतु स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए जाएं।

ज्ञापन देने में रिसर्च स्कॉलर विनीत दुबे , अतुल अवस्थी शिवेंद्र पांडे , अर्पित शुक्ला , अभिषेक सिंह अभय शंकर पांडे आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।


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