सच्ची मित्रता धन-संपत्ति की मोहताज नहीं होती: उमंग दीक्षित
बिल्सी। मोहल्ला संख्या पांच स्थित शिव शक्ति भवन मंदिर में चल रही भागवत कथा में आचार्य उमंग दीक्षित ने सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता का प्रसंग बड़े ही मार्मिक ढंग से सुनाया। उन्होनें कहा कि सुदामा, जो अत्यंत गरीब ब्राह्मण थे। सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र कृष्ण से मिलने द्वारका जाते हैं। द्वारपालों द्वारा रोके जाने पर, वे अपना परिचय कृष्ण के मित्र के रूप में देते हैं। कृष्ण, सुदामा का नाम सुनते ही, उन्हें गले लगाने के लिए दौड़ पड़ते हैं। यह दृश्य देखकर सभी भाव-विभोर हो जाते हैं। इस प्रसंग से हमें यह सीख मिलती है कि सच्ची मित्रता धन-संपत्ति की मोहताज नहीं होती। कृष्ण ने सुदामा को बिना मांगे ही, उनकी गरीबी दूर कर दी और उन्हें अपार धन-संपदा प्रदान की। सुदामा चरित्र हमें यह भी सिखाता है कि हमें हमेशा अपने मित्रों के प्रति वफ़ादार और समर्पित रहना चाहिए। इस मौके पर काफी लोग मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat