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बिसौली। डी पॉल स्कूल में 79 वें स्वतंत्रता दिवस को पूरे उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया
गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डी पॉल स्कूल के प्रबंधक फादर मार्टिन बीसी का छात्रों ने स्कूल बैंड के द्वारा उनका स्वागत किया। इसके पश्चात इशिता वार्ष्णेय ने फादर मॉर्टिन बीसी को तथा आराध्या दीसवर ने डी पॉल स्कूल की प्रधानाचार्य सिस्टर जोशिता को गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया। कक्षा 7 की छात्रा पावनी वार्ष्णेय द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का हार्दिक स्वागत किया गया। इसके उपरांत स्कूल के प्रबंधक फादर मार्टिन बीसी के द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और सभी ने ध्वज को सलामी दी। इसके साथ ही स्कूल के चारों हाउस रेड हाउस, ब्लू हाउस, ग्रीन हाउस, तथा एलो हाउस ने भी स्कूल बैंड के द्वारा ध्वज को सलामी दी। स्कूल के प्रबंधक फादर मार्टिन बीसी ने सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा उन्होंने अपने भाषण में बताया कि आज हम 79 वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। भारत को 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी। इस दिन हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का सम्मान करते हैं। आज पूरा देश राष्ट्रीय ध्वज फहराकर स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 15 अगस्त 1947 का दिन हमारे इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है जब हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और संघर्ष के परिणाम स्वरुप हमें अंग्रेजों की ब्रिटिश हुकूमत से आजादी मिली। इस आजादी के लिए महात्मा गांधी, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई जैसे अनेक वीरों ने अपना पूरा जीवन न्योछावर कर दिया। हमें आजादी तो मिल गई लेकिन इसकी रक्षा करना और देश को आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है। फादर मार्टिन बीसी ने कहा कि आज के दिन हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम जाति, धर्म और भाषा से ऊपर उठकर एक सशक्त, शिक्षित और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देंगे। आइए, हम सब मिलकर यह प्रण लें कि हमारे देश की आन, बान और शान तिरंगा सदा ऊंचा रहे। जय हिंद!जय भारत! के नारे के साथ उन्होंने अपने भाषण का समापन किया। उसके उपरांत अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। जिसमें ग्रीन हाउस के छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति गीत गया। कक्षा 8 की छात्राओं द्वारा देशभक्ति गीत पर नृत्य किया गया। उसके बाद अनेक प्रतियोगिता कराई गई जिनको पांच स्टेज में बांटा गया। सभी प्रतियोगिताओं में छात्र /छात्राओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और आनंदपूर्वक सभी का लुफ्त उठाया।
Budaun Amarprabhat