109वीं मासिक काव्य गोष्ठी
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के.बी.हिंदी सेवा न्यास
(पंजी.)बिसौली की लगातार 109वीं मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन न्यास के कार्यालय पर हुआ।
अध्यक्षता नगर के समाजसेवी श्री हरस्वरूप शर्मा ने की. अशोक दुबे मुख्य अतिथि रहे। संचालन न्यास के सह सचिव विजय कुमार सक्सेना ‘विजय’ ने किया।
शुभआरम्भ मंचासीन अतिथियों सँग न्यास अध्यक्ष डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ‘सुधांशु’ द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। डॉ. सुधांशु ने वाणी वंदना की।
श्रीपाल शर्मा ‘शमन’ने कहा-
मक्का वाले मक्का जाओ, मिलते खुदा मदीने में।
हम तो हनुमत के दीवाने,
राम मिलेंगे सीने में।
अशोक कुमार द्विवेदी ने कहा –
बेटी की शादी कर दी तो पापा रिश्तेदार हो गए।
ज़ब से बहुयें घर में आईं
वे रद्दी अख़बार हो गए।
डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ‘सुधांशु’ ने सुनाया –
खोज रहे परिवार का, बचा खुचा आधार।
वारिस अपने वंश के,दो-दो
लड़के यार।।
विजय कुमार सक्सेना ‘विजय’ ने सुनाया –
एक नाम परमात्मा, है जग में विख्यात।
बख्शी है जिसने हमें, खुशियों की सौगात।
रामकृपाल तिवारी ने कहा –
मेरी बेचैनियाँ देखो तुम्हें मैं याद करता हूँ।
सोचता रहता हूँ तुमसे मिलन फरियाद करता हूँ।
हर स्वरूप शर्मा ने कहा –
माया को तो सब भजें माधव भजे न कोय।
मॉधव को यदि जो भजे
माया चेरी होय।
साक्षी शर्मा ने कहा –
मोबाइल ने कर दिया, मिलना जुलना बंद।
अब भाई भी रह गया, मात्र फेस बुक फ्रेंड।
रमेश चन्द्र मिश्र ‘सहज’ ने कहा –
मेम बताओ मुझको ‘बी’, शहद कहाँ से लाती है।
बैग टंगा रहता है पर, स्वयं नहीं क्यों खाती हूँ।
अंत में अध्यक्ष के उदबोधन के साथ गोष्ठी का समापन किया गया। डॉ. सुधांशु ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर रुद्रांश, भक्ति शर्मा, आशुतोष कुमार शर्मा, सुधीर कुमार शर्मा आदि उपस्थित रहे।
Budaun Amarprabhat