धनुष भंग की कथा सुनकर दर्शक हुए रोमांचित
बिल्सी। कछला रोड स्थित माहेश्वरी भवन में चल रही रामकथा में ऋषिकेश (उत्तराखंड) से पधारे कथावाचक अयोध्यादास रामायणी महाराज ने भगवान राम द्वारा किए गए धनुष भंग के प्रसंग का मार्मिक ढंस से प्रस्तुत किया। कथा में महाराज ने बताया कि विश्वामित्र मुनि राम और लक्ष्मण को लेकर जनकपुरी पहुंचते है। वहां शिव धनुष तोड़ने की शर्त पर सीता का विवाह होना तय होता है। जिसमें आए कई देश के राजाओं के धनुष न उठा पाने से वह निराश हो गए। तब राजा जनक के शब्द सुनकर लक्ष्मण जी उत्तेजित हो जाते हैं, जिन्हें श्रीराम ने शांत करते हुए कहा कि लखन तुम शांत हो बैठो। विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्री राम ने धनुष का खंडन कर दिया। धनुष टूटने पर हुई घनघोर गर्जना सुन महिद्राचल पर तपस्या में लीन महर्षि परशुराम की तंद्रा भंग हो गई। श्री राम जी परशुराम को शांत करने का प्रयास करते हैं। यहां लक्ष्मण के शब्द सुनकर परशुराम का क्रोध अधिक बढ़ जाता है और वह लक्ष्मण को मारने के लिए दौड़ते हैं। कथा में पहुंचे विधायक हरीश शाक्य ने महाराज से आशीर्वाद लिया। इस मौके पर पूर्व चैयरमेन ओमप्रकाश सागर, अजय प्रताप सिंह, नरेन्द्र गरल, डा.राजाबाबू वाष्र्णेय, दिनेश बाबू, चन्द्रपाल तोष्णीवाल, लोकेश बाबू वार्ष्णेय, नीरज माहेश्वरी आदि मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat