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सहनशीलता एवं धैर्य भगवान श्रीराम के विशेष गुण थे

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सहनशीलता एवं धैर्य भगवान श्रीराम के विशेष गुण थे

बिल्सी में रामकथा का पांचवा दिन

बिल्सी। नगर के कछला रोड स्थित श्री माहेश्वरी भवन में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन कथावाचक अयोध्यादास रामायणी ने भगवान राम के गुणों का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का राजा दशरथ के घर में जन्म हुआ था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, धरती पर असुरों का संहार करने के लिए भगवान विष्णु ने त्रेतायुग में श्रीराम के रूप में अवतार लिया। श्रीराम रघुकुल की शाश्वत परंपराओं के पोषक एवं संरक्षक थे। चैत्र शुक्ल नवमी प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में विख्यात है। त्रेता युग में श्रीराम ने राक्षसों के आतंक से इस धरती को मुक्त करके सुख, शांति और समृद्धि के राज्य की नींव रखी थी। श्रीराम दृढ़ संकल्प के धनी थे। अपने संपूर्ण जीवन में उन्होंने मनसा, वाचा, कर्मणा जो भी प्रतिज्ञा की, उसे मनोयोग से पूर्ण किया। श्रीराम का पूरा जीवन त्याग, मर्यादा, संयम और धैर्य का परिचायक है। विषम परिस्थितियों में भी वे नीति सम्मत रहे। स्वयं की भावना एवं सुखों से समझौता कर सदा धर्म एवं सत्य का साथ दिया। उन्होने कहा कि सहनशीलता एवं धैर्य भगवान श्रीराम के विशेष गुण थे। 14 वर्ष वन में संन्यासी की भांति जीवन बिताना उनकी सहनशीलता की पराकाष्ठा है। इस मौके पर दातागंज के विधायक राजीव कुमार सिंह, नरेन्द्र गरल, मनोज वार्ष्णेय, लोकेश वार्ष्णेय, विवेक राठी, सुदीप चौहान, नीरज माहेश्वरी, संजीव वार्ष्णेय, दिनेश बाबू वार्ष्णेय, आशीष वशिष्ठ आदि मौजूद रहे।


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