📰 बदायूँ में दवा माफ़ियाओं का खेल! निजी चिकित्सक ने खोला राज़, कहा – ‘न लिखी दवा तो कर देंगे बर्बाद’
बदायूँ। जनपद बदायूँ में दवा माफ़ियाओं और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगे हैं। सैदपुर निवासी निजी चिकित्सक डॉ. सैय्यद मुदस्सिर अली ने खुलासा किया है कि उन्हें फर्जी शिकायतों, धमकियों और दबाव के जरिए लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। चिकित्सक ने इस मामले की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिला अधिकारी बदायूँ, मुख्य चिकित्सा अधिकारी बदायूँ, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से कर निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है।
दवा कम्पनी का दबाव और धमकी
डॉ. अली के अनुसार, गत अप्रैल माह के पहले सप्ताह में AZIDAN PHRAMA अजिदान फार्मा कम्पनी से जुड़े प्रतिनिधि उनके क्लीनिक पर पहुँचे और कम्पनी की दवाइयाँ लिखने का दबाव बनाने लगे। इनमें डॉ. सुबूर खान (आयुष चिकित्सक, CHC जगत, RBSK योजना), श्री आसिफ़ हुसैन (जिला डाटा मैनेजर, आईडीएसपी), डॉ. दानिश अंसारी (निजी चिकित्सक) और श्री अजमत अली खान (अजमत मेडिकल स्टोर संचालक) शामिल थे।
चिकित्सक का आरोप हैइनकी कंपनी की दवा न लिखने पर इन लोगों ने साफ शब्दों में धमकी दी –
“अगर हमारी कम्पनी की दवा नहीं लिखी तो तुम्हें चैन से प्रैक्टिस नहीं करने देंगे।”
फर्जी शिकायतों का सिलसिला
डॉ. अली ने बताया कि धमकी के बाद इन लोगों ने ‘सलीम’ नामक फर्जी व्यक्ति से उनके खिलाफ मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। जांच में सामने आया कि शिकायत में दर्ज मोबाइल नंबर वास्तव में आरोपी पक्ष से जुड़े व्यक्ति(आसिफ )के नाम पर पंजीकृत है।
यहीं नहीं रुके आरोपी! हाल ही में एक कथित पत्रकार, जो अक्सर CMO कार्यालय में सक्रिय रहता है, से भी शिकायत कराई गई।और सीएमओ ऑफिस से फिर नोटिस दिलवाया गया। चिकित्सक का कहना है कि यह सब संगठित षड्यंत्र के तहत हो रहा है।
मानसिक प्रताड़ना और सबूत
डॉ. अली का कहना है कि इन झूठी शिकायतों के कारण उनकी पेशेवर छवि धूमिल की जा रही है और लगातार मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास पूरे मामले से जुड़े व्हाट्सऐप चैट, रिकॉर्डेड कॉल और CCTV फुटेज मौजूद हैं, जो इस षड्यंत्र की पोल खोलने के लिए पर्याप्त हैं।
कड़ी कार्रवाई की मांग
चिकित्सक ने जोर देकर कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के विरुद्ध भा.दं.सं., आईटी एक्ट व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए और भविष्य में इस तरह की फर्जी शिकायतों को रोकने व चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के कदम उठाए जाएँ।
विश्वस्त सूत्रों से यह भी पता चला है यह लोग सीएमओ ऑफिस की मिलीभगत से जनपद के झोलाछाप डॉक्टरों को भी खुला संरक्षण दिलवा का कर अपनी कंपनी की दवाई लिखवाने के लिए बाध्य करते है । सीएमओ ऑफिस में पूरा एक गिरोह जिसमें सरकारी कर्मचारी और कुछ अधिकारी भी शामिल है काम कर रहा जो झोलाछाप डॉक्टरों का आर्थिक शोषण करके उनके उस नाजायज कारोबार को बढ़ावा दे रहे है ।
मामला तूल पकड़ता नज़र आ रहा है
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर चिकित्सकों को दवा माफ़ियाओं के दबाव में काम करना पड़ेगा तो इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ेगा। ऐसे में प्रशासन को तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
Budaun Amarprabhat