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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का कर्मचारी जागरण अभियान जारी*

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*राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का कर्मचारी जागरण अभियान जारी*
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👉 *18 अक्टूबर को जनपद स्तर पर होगा प्रदर्शन*

लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का कर्मचारी जागरण अभियान 4 सितंबर से लगातार चल रहा है । प्रदेश के सभी जनपदों में भोजन अवकाश के समय में संयुक्त परिषद के पदाधिकारी सभी जनपदीय कार्यालयों में जाकर कर्मचारियों से संपर्क कर रहे हैं एवं कर्मचारियों की मांगों पर सरकार की उदासीनता से अवगत करा रहे हैं ।

जनपद शाखा मिर्जापुर, वाराणसी, सुल्तानपुर, महोबा हमीरपुर, गोरखपुर, कानपुर , सहित सभी जनपद शाखाओं के कार्यक्रम सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित प्रसारित किए जा रहे हैं। संयुक्त परिषद से संबद्ध रोडवेज कर्मचारी कल्याण संघ, आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन, यू पी सिविल फूड एंड सिविल सप्लाईज इंस्पेक्टर्स ऑफिसर्स एसोसिएशन, डिप्लोमा लैब टेक्नीशियन संघ मध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ , नगरीय परिवहन संविदा कर्मचारी परिषद, चकबंदी अधिकारी संघ, फाइलेरिया इंस्पेक्टर्स एसोसिएशन, एक्सरे टेक्नीशियन एसोसिएशन, ई सी जी टेक्नीशियन एसोसिएशन, इलेक्ट्रिशियन संघ, कीट संग्रह कर्ता संघ, सहित सभी संगठनों के पदाधिकारी भी कर्मचारी जागरण अभियान में तत्परता के साथ लगे हुए हैं।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी, महामंत्री अरुणा शुक्ला, उपाध्यक्ष त्रिलोकी नाथ चौरसिया , डी के त्रिपाठी, ने आज लखनऊ में कर्मचारी जागरण अभियान की समीक्षा किया और कर्मचारियों को कुछ आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए।

संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने अवगत कराया है कि 18 अक्टूबर को जनपद मुख्यालय पर कर्मचारी धरना प्रदर्शन करके मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को मांगों का ज्ञापन भेजेंगे। उन्होंने अवगत कराया है कि विगत 18 माह से मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव कार्मिक के स्तर पर कोई वार्ता नहीं हुई है, जिसके कारण कर्मचारियों की मांगे ठंडे बस्ते में चली जा रही है। विभिन्न विभागों में भी अधिकारी ,कर्मचारियों की मांगों के प्रति उदासीन रवैया बनाए हुए हैं। कर्मचारियों का शोषण चरम पर है।

खाद्य रसद विभाग में नीति विरुद्ध किए गए पदाधिकारियों के स्थानांतरण अभी तक निरस्त नहीं किए गए हैं, समाज कल्याण विभाग एवं जनजाति विभाग में 60% औसत परीक्षा परिणाम को मनमाने तरीके से लागू करते हुए दर्जनों शिक्षकों को नौकरी से हटा दिया गया है लेकिन विभाग के अधिकारी एवं विभागीय मंत्री संज्ञान लेकर कार्यवाही नहीं कर रहे हैं। विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को भरे जाने का मामला भी ठन्डे बस्ते में पड़ा हुआ है ,आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए निगम तो बन गया लेकिन विभागों में उसका क्रियान्वयन नहीं हो रहा है ।आउटसोर्स कंपनियां पहले से कार्यरत कर्मचारियों को निकाल कर नई भर्ती करने में लगी हुई है।

वित्त विभाग में फाइलेरिया निरीक्षक, चकबंदी संवर्ग, विपणन, आपूर्ति निरीक्षक सहित कई विभागों के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों पर मुख्य सचिव का निर्णय अभी तक नहीं हुआ है, मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी सहायक चकबंदी अधिकारी संवर्ग के पदों की नातो विसंगति दूर की गई है और नहीं उन पदों को राजपत्रित प्रतिष्ठा प्रदान की गई है।

नगरीय परिवहन सेवाओं में लगे हुए संविदा चालकों परिचालकों को हटाया जा रहा है वाराणसी, आगरा, प्रयागराज, मथुरा,सहित कई महानगरों में नगरीय परिवहन सेवाओं को पूरी तरह निजीकरण के हाथों में सौंप दिया गया है और वहां के कर्मचारी बेरोजगार होकर भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। लखनऊ में भी गोमती नगर डिपो बंद कर दिया गया है केवल दुबग्गा डिपो में कुछ कर्मचारी रह गए हैं बाकी सब सेवाएं निजी ऑपरेटरों को सौंप दी गई है। आम जनता से जुड़ी हुई परिवहन विभाग की सेवाएं भी पूरी तरह से निजी ऑपरेटरों के हाथों में सौंप दी गई है डग्गामारी पर कोई अंकुश नहीं है। परिवहन विभाग के कर्मचारी लगातार प्रयास कर रहे हैं लेकिन विभाग में कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव कार्मिक को लगातार पत्र लिखकर कर्मचारियों की समस्याओं पर वार्ता/ समीक्षा करने एवं उचित समस्याओं का संज्ञान लेकर निदान करने का अनुरोध किया है लेकिन मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव कार्मिक पत्रों का संज्ञान नहीं ले रहे हैं। इस संबंध में संयुक्त परिषद ने मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है।

परंतु अफसर शाही के हावी होने के कारण प्रजातंत्र के ढांचे में कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने मुख्यमंत्री को पुनः पत्र लिखकर कर्मचारियों की प्रमुख मांगों का संज्ञान लेने , दशहर एवं दीपावली पर्व से पूर्व वेतन का भुगतान करने, महंगाई भत्ते की किश्त भुगतान करने एवं कर्मचारियों को बोनस देने की मांग किया है। संयुक्त परिषद ने समाज कल्याण एवं जनजाति विकास विभाग में 60% औसत परिणाम की मनमानी बाध्यता को समाप्त कर हटाए गए सभी संविदा शिक्षकों को पुणे नौकरी पर वापस लिए जाने की मांग भी मुख्यमंत्री से किया है उन्होंने यह भी कहा है कि यदि समाज कल्याण विभाग में हटाए गए शिक्षक शीघ्र ही कार्य पर वापस नहीं लिए जाते हैं तो समाज कल्याण विभाग में भी आंदोलन तेज किया जाएगा।

प्रदेश के वित्त, राजस्व, उद्यान, सचिवालय, चिकित्सा, खाद्य रसद, विभागों में कार्यरत उन संविदा कर्मचारियों को जिनकी नियुक्ति सृजित पदों के सापेक्ष निर्धारित चयन प्रक्रिया के अनुसार की गई है तथा जिनको सरकार पद का न्यूनतम मूल वेतन एवं ग्रेड पे तथा महंगाई भत्ता दे रही है उन्हें भी बोनस का भुगतान करने तथा उन्हें नियमित करने की मांग किया है।


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