ख़ास बातें
नर्सें मेंटल हेल्थ सर्विसेज़ की सबसे महत्वपूर्ण कड़ीः प्रो. सुभाषिनी
प्रो. जेसलीन ने विस्तार से बताए मेंटल स्ट्रेस से बचाव के तरीके
नुक्कड नाटक से ग्रामीणों को मेंटल हेल्थ के प्रति किया अवेयर
मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर नर्सिंग कॉलेज, मुरादाबाद के मेंटल हेल्थ नर्सिंग विभाग और स्टुडेंट्स नर्सिंग एसोसिएशन की ओर से आयोजित सेमिनार में टीएमयू हॉस्पिटल में सीनियर रेसीडेन्ट डॉ. रिषभ चन्द्रा ने बतौर मुख्य अतिथि कहा, मेंटल हेल्थ, शारीरिक स्वास्थ्य के समान ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, अन्य मानसिक समस्याएं जैसे- अवसाद, चिंता, तनाव आदि आत्महत्या को बढावा दे रहे हैं। साथ ही सुझाव दिया, आत्म चिंतन, योग, ध्यान, परामर्श आदि के जरिए मानसिक स्वास्थ में सुधार किया जा सकता है। डॉ. चन्द्रा ने मेंटल हेल्थ की चुनौतियों, कारणों और समाधान पर विस्तार से चर्चा की। इसे पूर्व नर्सिंग कॉलेज की डीन प्रो. एसपी सुभाषिनी, प्राचार्या, प्रो. जेसलीन एम., मुख्य अतिथि सीनियर रेसीडेन्ट डॉ. रिषभ चन्द्रा, मेंटल हेल्थ नर्सिंग की एचओडी डॉ. सुमन वशिष्ठ आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। अंत में मेंटल हेल्थ को लेकर हुए प्रश्नोत्तरी सत्र में एक्सपर्ट्स से सवाल पूछे और अपने अनुभव भी साझा किए। संचालन पीजी टयूटर- मिस आरती और एमएससी नर्सिंग स्टुडेंट्स- शिफान रिजवी ने किया।
नर्सिंग कॉलेज की डीन प्रो. एसपी सुभाषिनी ने कहा, मानसिक स्वास्थ्य हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व, भावनाओं और व्यवहार का संतुलन है। आपात स्थितियों और आपदाओं के दौरान मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, नर्सें मेंटल हेल्थ सर्विसेज़ की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। प्राचार्या प्रो. जेसलीन एम. ने मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाने और मानसिक तनावों से बचाव के तरीकों को विस्तार से समझाया। दूसरी ओर नर्सिंग कॉलेज के मेंटल हेल्थ नर्सिंग विभाग की ओर से अमरोहा के ग्राम कपासी में वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे पर नुक्कड नाटक के जरिए ग्रामीणों को जागरूकता का संदेश दिया गया। साथ ही मन की बात मन में न रखो, कहो सुनो और जुडो…, मानसिक स्वास्थ्य को दें पहला स्थान, तभी होगा बीमारियों का निदान…, चुप्पी नहीं, समझदारी चाहिए, आत्महत्या नहीं, समाधान चाहिए… सरीखे नारों के जरिए मेंटल हेल्थ के महत्व को बताया। नाटक के जरिए नर्सिंग स्टुडेंट्स ने जागरूक करते हुए कहा, किसी भी मानसिक रोगी को अकेला न छोड़ें।
Budaun Amarprabhat