संवाददाता: गोविंद देवल
बदायूं। कारवान ए अमजद अकादमी के अध्यक्ष व संस्थापक, मशहूर शायर अहमद अमजदी से हाल ही में बरेली की दो प्रसिद्ध शख्सियतें, वरिष्ठ शायर डा. अमन बरेलवी और डा. शगुफ्ता ग़ज़ल, उनके आवास पर मिलने पहुँचीं। इस दौरान दोनों शायरों ने अपनी चर्चित कृतियाँ “सदाए बख़्शिश” और “माताए बख़्शिश” पेश कीं। अहमद अमजदी ने उन्हें दिल से बधाई और आभार व्यक्त किया।
मुलाकात के अवसर पर समाजसेवी चौधरी बफाती मियां, कांग्रेस पार्टी के PCC सदस्य और ज़िला उपाध्यक्ष बदायूं, के नवादा स्थित आवास पर एक शेरी नशिस्त का आयोजन भी किया गया। इसकी अध्यक्षता स्वयं अहमद अमजदी ने की।
महफ़िल की शुरुआत अहमद अमजदी ने नाते पाक से की:
“इस ज़मीं के लिए आस्माँ के लिए
आप रहमत हैं दोनों जहाँ के लिए
वक्त की नब्ज भी उस घड़ी थम गई
आप जिस दम गए लामकाँ के लिए”
मुख्य अतिथि डा. शगुफ्ता ग़ज़ल ने अपनी चर्चित ग़ज़ल से महफ़िल में समां बाँध दिया। उन्होंने कहा:
“साकी लिखा खुमार लिखा जाम लिख दिया
इक दिल बचा था वो भी तेरे नाम लिख दिया”
वशिष्ठ अतिथि डा. अमन बरेलवी ने कहा:
“ज़िन्दा रहो तो हुस्न की आबादियों के साथ
किया फायदा है जीने का तन्हाइयों के साथ”
अहमद अमजदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए:
“खुदा का शुक्र अदा जो कभी नहीं करते
कसम खुदा की वो हासिल ख़ुशी नहीं करते
मदद तो करते हैं हम भी मियां ग़रीबों की
यह और बात नुमाइश कभी नहीं करते”
वरिष्ठ शायर सादिक अलापुरी ने शायरी पेश करते हुए कहा:
“अपनी आँखों में सितारों को पिरोयें कब तक
हम शबे हिज़्र तेरी याद में रोयें कब तक”
राजवीर सिंह तरंग ने कहा:
“दुनिया में कुछ लोग निराले होते हैं
सब के दिल में बसने वाले होते हैं
दरिया भी दे देता है रास्ता उन को
जो साहिल से लड़ने वाले होते हैं”
आमान फर्रुखाबादी ने महफ़िल में यह पंक्तियाँ साझा कीं:
“याद मिटती नहीं मिटाने से
फायदा क्या है दिल जलाने से”
शाहज़ादी ने कहा:
“अगर है तू, हम भी
बादशाहों के हैं घराने से”
अंत में, महफ़िल की अध्यक्षता कर रहे चौधरी बफाती मियां ने कहा कि आज के दौर में शायर और कवि अपनी शायरी के माध्यम से दुनिया को मुहब्बत का पैग़ाम दे रहे हैं। उन्होंने सभी उपस्थित अतिथियों और शायरों का धन्यवाद किया और उम्मीद जताई कि इस तरह की महफ़िलें भविष्य में भी आयोजित होती रहें।
इस अवसर पर मोहसिन सिद्दीक़ी, हाफ़िज़ अताऊर रहमान, ताहिर उद्दीन, इकरार अली सहित कई अन्य शायर और साहित्यकार उपस्थित रहे। मुशायरा देर रात तक चला और अंत में अहमद अमजदी ने सभी का हृदयपूर्वक आभार व्यक्त किया।
Budaun Amarprabhat