संवाददाता: गोविंद देवल
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग श्रद्धा और वेद मंत्रोच्चार के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर अथर्ववेद के चतुर्थ मंडल के मंत्रों से यज्ञ संपन्न कराया गया।
यज्ञ का संचालन करते हुए पं. प्रश्रय आर्य जय ने कहा कि संसार का उपकार करना ही आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य है। आर्य समाज एक विद्यालय के समान है, जो मानव को सन्मार्ग दिखाता है। यह एक अस्पताल भी है, जो मन के रोगों का उपचार करता है तथा समाज में फैले पाखंड और कुरीतियों को दूर करने का निरंतर प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि आर्य समाज केवल एक ही धर्म को मानता है—मानवता।
सत्संग में श्रीमती पूजा आर्य ने धर्म की व्याख्या करते हुए बताया कि धर्म के दस लक्षण होते हैं। उन्होंने विशेष रूप से धृति, क्षमा और दम के महत्व को सरल शब्दों में समझाया।
इस अवसर पर डॉ. सत्यम आर्य एवं आचार्य कु. तृप्ति आर्य ने वेद मंत्रों का मधुर गायन किया तथा भजनों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम में राकेश आर्य, श्रीमती सरोज देवी, मुन्नी देवी, श्रीमती कमलेश रानी, बद्री प्रसाद आर्य, अनुज कुमार सिंह, विश्व विजय सिंह सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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