सहसवान में अग्रवाल धर्मशाला में चल रही श्री मद्भागवत कथा में कथा व्यास पं. हर्षित उपाध्याय ने जीवन के सुख-दुःख और मानसिक संतुलन पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में सुख-दुःख का चक्र हमेशा चलता रहता है। कुछ लोग बड़ी विपदाओं को भी हंसकर सह लेते हैं, जबकि कुछ लोग एक छोटे दुःख से ही टूट जाते हैं और जीवन भर उसके प्रभाव से मुक्त नहीं हो पाते।
कथा व्यास ने समझाया कि जो बीत गया, उसे भुलाकर भविष्य को नई दिशा देना ही वास्तविक जीवन है। उन्होंने कहा कि पुरानी स्मृतियों को बार-बार याद करना दुःख की ज्वाला को और भड़काता है। इसलिए दुःख होने पर उसे विस्मृत करना और वर्तमान में जीवन को सुखमय बनाना सर्वोत्तम उपाय है। कथा में कृष्ण-रुक्मणि विवाह का प्रसंग सुनाया गया और भक्तों ने आनंदपूर्वक नृत्य किया।
इस अवसर पर मुख्य यजमान संतोष गांधी उर्फ़ कल्लू सेठ, पुष्पा, प्रियांक, कोमल, शिव कुमार, अशोक कुमार, मुकुल, ध्रुव, अंश, मनीष सर्राफ, महेंद्र शर्मा, नरेंद्र, हिर्देश शर्मा आचार्य सहित अनेक भक्तगण उपस्थित रहे।
संवाददाता: डॉ. राशिद अली खान, सहसवान, बदायूं
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