संवाददाता गोविन्द देवल
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के पिंडौल गांव स्थित शिव मंदिर में चल रही रामकथा के छठवें दिन कथा वाचक वेदव्यास पंडित गौरव देव शर्मा ने परशुराम संवाद का अत्यंत भावपूर्ण और सारगर्भित वर्णन प्रस्तुत किया।
कथावाचक ने बताया कि सीता स्वयंवर में भगवान शिव का धनुष टूटने पर परशुराम क्रोध में जनक दरबार पहुंचे और इसे अपमान के रूप में देखकर सभी राजाओं के संहार की बात कहने लगे। इस अवसर पर श्रीराम ने विनम्रता से कहा कि धनुष तोड़ने वाला उनका दास है और वे सेवा की आज्ञा चाहते हैं। लक्ष्मण के तीखे वचनों से जहां परशुराम का घमंड झलकता है, वहीं श्रीराम अपने संयम और मर्यादा से उनके क्रोध को शांत कर देते हैं।
श्रीराम द्वारा धनुष पर बाण चढ़ाते ही परशुराम को उनके विष्णु स्वरूप का बोध होता है और वे अहंकार त्याग कर आशीर्वाद देते हैं। कथा में आगे परशुराम के प्रस्थान के बाद राजा जनक द्वारा अयोध्या नरेश दशरथ को निमंत्रण देने, बारात के जनकपुरी आगमन तथा श्रीराम-सीता सहित चारों भाइयों के विवाह का सुंदर वर्णन किया गया।
कथा स्थल पर फूलों की वर्षा हुई और कन्यादान हेतु महिलाएं वस्त्र एवं बर्तन लेकर पहुंचीं। पूरा पंडाल भक्तिमय माहौल से सराबोर रहा। अंत में श्रीराम की आरती के पश्चात श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया
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