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रामकथा के समापन पर शिव मनकामेश्वर मंदिर में हुआ भगवान राम का राज्याभिषेक

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संवाददाता आई एम खान
बिसौली। “दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, रामराज्य काहू नहीं ब्यापा”—इन पंक्तियों के माध्यम से कथाव्यास ने भगवान श्रीराम के आदर्श राज्य का भावपूर्ण वर्णन किया, जहां भक्ति प्रबल थी और सभी संबंधों में प्रगाढ़ता थी। नगर के होली चौक मोहल्ले स्थित शिव मनकामेश्वर पीपल वाले मंदिर में रामकथा के समापन अवसर पर भगवान राम का भव्य राज्याभिषेक संपन्न हुआ।
कथाव्यास देशपाल भारद्वाज ने भगवान राम के सुराज का वर्णन करते हुए कहा कि रामराज्य में किसी को भी दैहिक, दैविक अथवा भौतिक कष्ट नहीं होता था। सत्य, धर्म और करुणा पर आधारित यह शासन आज भी मानवता के लिए आदर्श है।
कथा प्रसंग में अयोध्या का अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया गया। चौदह वर्षों के वनवास और असंख्य कष्टों के बाद भगवान राम माता सीता और भ्राता लक्ष्मण सहित अयोध्या लौटे। दीपों से सजी अयोध्या में नगरवासियों ने पुष्पवर्षा और जयघोष के साथ उनका स्वागत किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गुरु वशिष्ठ ने भगवान राम को सिंहासन पर विराजमान कर पवित्र गंगाजल से उनका अभिषेक किया। माता सीता को राजमाता के रूप में सम्मान प्राप्त हुआ, जबकि भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न ने सेवाभाव से सहभागिता निभाई। हनुमान सहित समस्त वानर सेना और अयोध्यावासी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
इस अवसर पर अनुपम, प्रवीन, मोहित, निखिल, नितिन, विनय, कपिल, रूपम, लता, हर्ष, मनोरमा, अंचल, पारुल, कविता, पिया सक्सेना, राखी, कंचन, शीला, खुशी, रीना, शिखा, मीनल, सुमिशा, दीपशिखा, शिवांग सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।


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