भरत और श्रीराम के भ्रातृ प्रेम और कर्तव्यनिष्ठा का अद्भुत उदाहरण
बिल्सी।
आज तहसील बिल्सी के ग्राम पिंडौल में वेदव्यास पंडित गौरव देव शर्मा ने भारत मिलाप की कथा बड़ी रोचकता और भावनात्मक अंदाज में सुनाई। व्यास जी ने बताया कि रामचरितमानस में अयोध्या काण्ड का यह प्रसंग अत्यंत महत्वपूर्ण और हृदयस्पर्शी है।
कथा के अनुसार, श्रीराम के वनवास की खबर सुनकर भरत अपने प्रेम और कर्तव्य की भावना से राम को वापस अयोध्या लाने के लिए बड़ी सेना लेकर चित्रकूट पहुँचते हैं। रास्ते में उनकी भेंट निषादराज गुह से होती है, जो उन्हें श्रीराम के दर्शन कराते हैं। लक्ष्मण, भरत की सेना को देखकर आवेश में आ जाते हैं, लेकिन श्रीराम उन्हें समझाते हैं कि भरत का प्रेम सच्चा है और वे बिना सोचे-समझे कोई निर्णय नहीं लेते।
चित्रकूट में श्रीराम और भरत का मिलन होता है। भरत, श्रीराम को अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं, लेकिन श्रीराम वचनबद्ध रहते हुए वनवास पूरा करने का निर्णय करते हैं। इस पर भरत पादुकाओं को लेकर अयोध्या लौटते हैं और राजमहल में सिंहासन पर रखकर राम के प्रतिनिधि के रूप में राजकाज संभालते हैं। वे नंदीग्राम में एक कुटिया बनाकर राम के प्रतिनिधि के रूप में शासन करते हैं।
पंडित गौरव देव शर्मा ने बताया कि यह प्रसंग भ्रातृ प्रेम, निस्वार्थ सेवा, कर्तव्यनिष्ठा और वचनबद्धता का अद्भुत उदाहरण है। यह सिखाता है कि सच्चा प्रेम त्याग और समर्पण में होता है, और किसी भी आवेश में आकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।
कथा सुनते ही श्रोताओं की आंखों में आंसू छलक उठे। कथा के बाद भगवान की आरती की गई और मिष्ठान वितरण कर कार्यक्रम का समापन हुआ।
Budaun Amarprabhat