लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे.एन. तिवारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन से जुड़े प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार कर्मचारियों पर शिकंजा कसती जा रही है, जबकि कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई अहम निर्णय वर्षों से लंबित पड़े हैं।
जे.एन. तिवारी ने बताया कि मुख्य सचिव के एक आदेश के कारण प्रदेश के करीब 68 हजार कर्मचारियों का जनवरी माह से वेतन रोक दिया गया है। अब आचरण नियमावली में संशोधन कर दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की किसी भी चल संपत्ति, वाहन, सोना या निवेश की सूचना तत्काल विभागाध्यक्ष को देने तथा छह माह के मूल वेतन से अधिक शेयर बाजार में निवेश पर घोषणा करने का प्रावधान किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान आचरण नियमावली में पहले से ही नई चल-अचल संपत्ति खरीदने और हर वर्ष संपत्ति का विवरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसी व्यवस्था के तहत 68 हजार कर्मचारियों का वेतन रोका गया है, क्योंकि उन्होंने अपनी संपत्ति का विवरण पोर्टल पर अपलोड नहीं किया था।
तिवारी ने कहा कि इस संशोधन से कर्मचारियों को सामाजिक प्रतिष्ठा बनाए रखना भी मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बेटी की शादी के दौरान वाहन या गहने खरीदना पड़ता है, जिनकी कीमत दो लाख रुपये से अधिक होती है और सोने की कीमत भी काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में क्या कर्मचारियों को शादी-ब्याह के खर्च के लिए भी सरकार से अनुमति लेनी होगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों को परेशान करने से संबंधित आदेश लगातार जारी कर रही है और उनका सख्ती से पालन कराया जा रहा है, जबकि कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई मुद्दे वर्षों से लंबित हैं। चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग, खाद्य रसद विभाग, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग और उच्च शिक्षा विभाग में कई संवर्गों की नियमावलियां और पदोन्नति संबंधी प्रावधान लंबे समय से लंबित हैं।
जे.एन. तिवारी ने कहा कि 2001 के बाद संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की नियमावली 25 वर्षों से जारी नहीं की गई है। आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण पर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इसके अलावा सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों और मुख्य सचिव समिति की रिपोर्ट पर भी निर्णय लंबित है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि कर्मचारियों पर सख्ती के साथ-साथ उनके हितों से जुड़े लंबित मामलों पर भी समयबद्ध निर्णय लिया जाए। तिवारी ने बताया कि कर्मचारी आचरण नियमावली में प्रस्तावित संशोधन का असर प्रदेश के लगभग 12 लाख राज्य कर्मचारियों पर पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव कार्मिक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारी संगठनों के साथ समस्याओं पर वार्ता नहीं कर रहे हैं। संवादहीनता के चलते कर्मचारियों में पहले से ही नाराजगी है और ऐसे आदेशों से असंतोष और बढ़ सकता है।
Budaun Amarprabhat