अनन्त घोष ब्यूरो
बदायूं। उत्तर प्रदेश का अन्नदाता इस समय अभूतपूर्व कृषि संकट से जूझ रहा है। प्रदेशभर में आलू किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य न मिलने और कोल्ड स्टोरेज का लगातार बढ़ता भाड़ा किसानों की कमर तोड़ रहा है। खेती की बढ़ती लागत और घटती आय के बीच लाखों किसान कर्ज के बोझ तले दब चुके हैं। इस गंभीर स्थिति को लेकर अब किसान संगठनों की भूमिका और उनके उत्तरदायित्व पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
कृषि विशेषज्ञों और किसानों का मानना है कि अब समय आ गया है कि उत्तर प्रदेश के सभी किसान संगठन राजनीति और निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर आलू किसानों के हित में एकजुट हों। यदि संगठनों का उद्देश्य वास्तव में किसानों की सेवा करना है, तो उन्हें सरकार के समक्ष पुरजोर तरीके से अपनी मांगें रखनी होंगी।
किसानों की प्रमुख मांगें में कोल्ड स्टोरेज का भाड़ा पूरी तरह माफ किया जाए या किसानों को उस पर भारी राहत दी जाए।आलू किसानों का कृषि ऋण पूर्ण रूप से माफ किया जाए। आलू के लिए लाभकारी एवं सुनिश्चित समर्थन मूल्य घोषित किया जाए। संकटग्रस्त किसानों को समय पर आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
जब तक किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम नहीं मिलेगा, तब तक कृषि संकट बना रहेगा। किसानों का मजबूत होना ही प्रदेश और देश की मजबूती की कुंजी है।
Budaun Amarprabhat