बिसौली। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में के.बी. हिंदी सेवा न्यास (पंजीकृत) की 119वीं मासिक काव्य गोष्ठी का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। यह साहित्यिक कार्यक्रम न्यास के सचिव विजय कुमार सक्सेना ‘विजय’ के आवास पर उनके पूज्य पिता, कीर्तिशेष श्याम बहादुर सक्सेना की पुण्यतिथि की स्मृति में आयोजित हुआ। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ‘सुधांशु’ ने की। कार्यक्रम में बिल्सी से पधारे सुप्रसिद्ध कवि विष्णु असावा मुख्य अतिथि तथा बिल्सी के ही प्रतिष्ठित गजलकार ओजस्वी जौहरी ‘सरल’ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। काव्य संध्या का कुशल एवं सधा हुआ संचालन युवा कवि राजीव कुमार उपाध्याय ने किया।
गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना से हुआ, जिसके उपरांत आमंत्रित कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य अतिथि विष्णु असावा ने पारिवारिक उपेक्षा और मानवीय संवेदनाओं को छूती पंक्तियां प्रस्तुत कीं:
“जर्जर काया बूढ़ी माँ की, घर में टूटी खटिया पर।
चार-चार बेटे हैं फिर भी, उसे भरोसा लठिया पर।।”
विशिष्ट अतिथि गजलकार ओजस्वी जौहरी ‘सरल’ ने हिंदी वर्णमाला के महत्व को रेखांकित करते हुए पढ़ा:
“क से लेकर ज्ञ तक का हमें ज्ञान कराती है हिंदी।
सात सुरों की सरगम का भी भान कराती है हिंदी।।”
अध्यक्षीय पीठ से डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ‘सुधांशु’ ने हिंदी की मिठास और शालीनता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी सरलता और शिष्टता का संचार करने वाली भाषा है। न्यास के सचिव विजय कुमार सक्सेना ‘विजय’ ने अपने दिवंगत पिता को काव्यात्मक श्रद्धांजलि देते हुए भावुक स्वर में कहा:
“हजारों साए दुनियाँ में मगर ऐसा नहीं कोई,
पिता के नाम के साए की जो भर दे जगह कोई।”
संचालक राजीव उपाध्याय ने हिंदी को भाषा के उद्यान का अनुपम पुष्प बताया। इसके बाद रमेश मिश्र ‘सहज’ ने मां और मातृभाषा के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदी के माध्यम से उन्होंने पहला अक्षर ‘माँ’ बोला। कवि अशोक कुमार दुबे ने अक्षरों की लड़ियों को मां की माला का रूप दिया, वहीं नरेंद्र पाठक ‘अभाषित’ ने हिंदी के स्वदेशी स्वरूप पर बल देते हुए अपनी प्रस्तुति दी। रामकृपाल तिवारी ने हिंदी को महारानी की संज्ञा दी, जबकि हरगोविंद पाठक ‘दीन’ ने वर्तमान समाज में अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव और मातृभाषा की उपेक्षा पर तीखा व्यंग्य कसा।
काव्य पाठ के उपरांत सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। शिक्षक रहे स्व. श्याम बहादुर सक्सेना की स्मृति में नगर के पांच सेवानिवृत्त शिक्षकों को शाल, स्मृति चिन्ह एवं पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही न्यास के अध्यक्ष व सचिव द्वारा सभी कवियों को अंगवस्त्र, प्रतीक चिन्ह और न्यास की पत्रिका प्रदान की गई। अंत में आयोजक विजय कुमार सक्सेना ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
Budaun Amarprabhat