कछला। उत्तर प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों में पिछले 25 वर्षों से स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की दोहरी व्यवस्था में कार्यरत लगभग 3,000 असिस्टेंट प्रोफेसरों ने अपनी उपेक्षा से आहत होकर आंदोलन का रास्ता चुना है। शिक्षकों ने सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण और सम्मानजनक मानदेय की मांग को लेकर शासन का ध्यान खींचने के लिए शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का बहिष्कार करने का ऐलान किया है।
इसी क्रम में एमजेपी रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली से संबद्ध गोविंद बल्लभ पंत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कछला के शिक्षकों ने अपनी आवाज बुलंद की। शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ शिक्षण कार्य कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें आर्थिक और सेवा सुरक्षा से वंचित रखा गया है।
शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि वे कैशलेस चिकित्सा योजना के विरोधी नहीं हैं, बल्कि अपनी लंबित मूल समस्याओं के समाधान हेतु प्रतीकात्मक विरोध दर्ज करा रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि स्ववित्तपोषित शिक्षकों के लिए स्थायी नीति बनाकर सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण और सम्मानजनक मानदेय दिया जाए, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
अपनी मांगों को लेकर शिक्षक प्रशासनिक अधिकारियों के जरिए मुख्यमंत्री को लगातार ज्ञापन भेज रहे हैं। इस मौके पर डॉ. ओमश्री मिश्रा, नीरू शर्मा, सारिका सक्सेना, डॉ. सीमा सक्सेना और डॉ. उपासना वशिष्ठ सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे। शिक्षकों ने लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही।
Budaun Amarprabhat