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टीएमयू कृषि एक्सपर्ट प्रो. महेश सिंह अंतर्राष्ट्रीय पटल पर छाए

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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग- एनआईओएस- स्टुडियो, नोएडा से गेहूं की फसल के प्रमुख रोग और कीटः पहचान, रोकथाम और सतत प्रबंधन पर विशेषज्ञ वार्ता का भारत सहित कुवैत, नेपाल, कतर, सऊदी अरब, बहरीन, सुल्तानत ऑफ ओमान और संयुक्त अरब अमीरात सरीखे देशों में दूरदर्शन और पीएम ई-विद्या जैसे चैनलों पर प्रसारण

मुरादाबाद। कहते हैं, नॉलेज का स्पेस सम्पूर्ण ब्रहमाण्ड है। इसे किसी देश की सीमाओं से नहीं बांधा जा सकता है। ज्ञान को पंख दीजिएगा तो उसकी उड़ान अनंत है। सच यह है, डिजिटल क्रांति के चलते नॉलेज का प्रसार चांद के पार भी संभव है। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंस में प्लांट पैथोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. महेश सिंह का ध्येय भी यही है। नॉलेज को अपने तक सीमित न रखिए, बल्कि इसे वैश्विक प्लेटफार्म दीजिएगा। प्रो. सिंह लंबे समय से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग- एनआईओएस- स्टुडियो, नोएडा से संबंद्ध हैं। टाइम-टू-टाइम प्रो. महेश दुनिया के धरतीपुत्रों को फसल प्रबंधन से लेकर प्लांट पैथोलॉजी के तमाम दुश्वारियों के निदान और न्यू रिसचर्स पर अपनी अनमोल राय साझा करते रहते हैं। उन्होंने एनआईओएस- स्टुडियो, नोएडा से हाल ही में गेहूं की फसल के प्रमुख रोग और कीटः पहचान, रोकथाम और सतत प्रबंधन पर लाइव टेलीविजन कार्यक्रम में बतौर विशेषज्ञ अपने विचार साझा किए। प्रोग्राम का भारत सहित कुवैत, नेपाल, कतर, सऊदी अरब, बहरीन, सुल्तानत ऑफ ओमान और संयुक्त अरब अमीरात सरीखे देशों में दूरदर्शन और पीएम ई-विद्या जैसे चैनलों पर प्रसारण हुआ।
प्रो. महेश सिंह आचार्य नरेन्द्र देव यूनिवर्सिटी, अयोध्या से पीएचडी हैं। बेस्ट टीचर का अवार्ड उनकी झोली में है। दो पुस्तकों के लेखक प्रो. सिंह के अब तक 40 से अधिक रिसर्च पेपर्स नेशनल और इंटरनेशनल जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. सिंह ने गेहूं की फसल को प्रभावित करने वाले प्रमुख रोगों और कीटों की पहचान, उनके नियंत्रण के उपायों और सतत प्रबंधन के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने किसानों और कृषि छात्रों को इन समस्याओं से निपटने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए। डॉ. सिंह ने बताया कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवीनतम कृषि तकनीकों का उपयोग करके गेहूं की फसल को अधिक उत्पादक और सुरक्षित बनाया जा सकता है। बतौर विशेषज्ञ डॉ. सिंह कहते हैं, यह कार्यक्रम कृषि क्षेत्र में सुधार और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वोकेशनल एजुकेशन प्रोग्राम के तहत आयोजित इस प्रोग्राम का उद्देश्य कृषि शिक्षा में सुधार करना और टिकाऊ फसल प्रबंधन पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता फैलाना है। कृषि विशेषज्ञ, शिक्षाविदों और उन्नत काश्तकारों का मानना है, ऐसे लाइव कार्यक्रम हमेशा भारत की कृषि विशेषज्ञता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने में अभूतपूर्व भूमिका निभाते हैं।


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