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प्राणी मात्र से प्रेम करें, अहिंसक बनें : प्रश्रय आर्य

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प्राणी मात्र से प्रेम करें, अहिंसक बनें : प्रश्रय आर्य

बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर पर आर्य समाज के तत्वावधान में रविवार को साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया। आर्य समाज के युवा भजनोपदेशक प्रश्रय आर्य जय ने यहां यज्ञ संपन्न कराया। ईशा आर्य, कौशिकी आर्य ने वेद मंत्रों का पाठ किया। अथर्ववेद के प्रथम अध्याय के 13वें सुक्त के मंत्रों से यज्ञ किया गया। जिसमें मनुष्य जीवन के कर्तव्यों का प्रतिपादन किया गया है। प्रश्रय आर्य ने वेदार्थ समझाते हुए कहा कि अच्छा मनुष्य बनना है तो पाँच बाते कभी न भूलें। सदा विचारें कि मैं मनुष्य हूँ पशु नहीं अतः सदा श्रेष्ठ कर्म करें। अभिवादन शील बने। प्रसंशक बने निन्दक नहीं। प्राणी मात्र से प्रेम करें। शाकाहार योगाभ्यास से शरीर को पवित्र व स्वस्थ रखे। उन्होंने कहा जो भी इन शिक्षाओं को मानता है वह स्वयं सुखी होकर सबको सुखकारी होता है। इस मौके पर साहब सिंह, सूरजवती देवी, राकेश आर्य, मोना रानी, संतोष कुमारी आदि मौजूद रही।


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