मनुष्य के साथ केवल उसकी अच्छाई और बुराई ही जाती है
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर पर आर्य समाज के त्तवावधान में रविवार को साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया। अंतर्राष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने यज्ञ कराते हुए कहा कि जैसे रोटी खाने से भूख मिट जाती है और व्यक्ति तृप्त हो जाता है वैसे ही हम सबको सांसारिक विषय वासनाओं से जीवन रहते तृप्त हो जाना चाहिए, मुक्त हो जाना चाहिए। दुनिया का सबसे बड़ा सच यह है कि यहां कोई भी मनुष्य खाली हाथ आता है और कुछ भी साथ लेकर नहीं जाता जो कुछ जोड़ता है सब यही छोड़ता है। मनुष्य के साथ केवल उसकी अच्छाई और बुराई जाती है। यदि हमने परोपकार किया अच्छे काम किये तो हमें लोग अच्छे इंसान के रूप में याद करते हैं और यदि हमने बुरे काम किया तो हमें बुराई के रूप में याद किया जाता है। जिसकी भोगों को भोगने की प्यास नहीं मिटती वह खरबपति होकर भी प्यासा ही दुनिया से चला जाता है और थोड़ा होकर भी जिसने अपने को तृप्त कर लिया वह तृप्त होकर संसार से जाता है। तृप्त होना ही जीवन का मुख्य लक्ष्य है। तृप्ति शास्त्री ने महाराजा भर्तृहरि का श्लोक सुनाते हुए कहा कि जगत में उनकी मिट्टी है चिंता जो प्रभु के चरणों में आ पड़े हैं, वही हमेशा हरे भरे हैं जो प्रभु के चरणों में आ पड़े है। इस मौके पर ईशा आर्य, कोशिकी आर्य, मुन्नी देवी, गुडडो देवी, सरोज देवी, राकेश आर्य समेत आर्य संस्कारशाला के बच्चे मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat