Breaking News

पिता के बैठ कर कंधों पे हमने सार घूमा है

Spread the love

मुक्तक
1
पिता अहसास होता है पिता विश्वास होता है।
सभी बच्चों की अन्तरात्मा की आस होता है।
ये मीनारें भी ऊंची हैं ये ऊंचे हैं सभी आलय –
पिता की माप लो ऊंचाई वह आकाश होता है।।
2
मेरे हाथों को चूमा है मेरे माथे को चूमा है।
देख मुस्कान चेहरे पर मेरे गालों को चूमा है।
न जीवन मे कभी घूमेंगे इतना चाह कर “अम्बर” –
पिता के बैठ कर कंधों पे हमने सार घूमा है।।

अमित वर्मा अम्बर उसावां बदायूं


Spread the love

About Govind Deval

Check Also

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की बैठक सम्पन्न, वेद प्रकाश गुप्ता को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

Spread the loveबदायूँ। भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के तत्वावधान में शक्ति टेंट हाउस परिसर में …

error: Content is protected !!