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वक्त से पहले जो अपनों को खोया हो हद से भारी बोझ दिलों पर ढोया हो

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मुक्तक
1-
आहटें उसकी यूं नींदों से जगा देती हैं
भीनी बरसातें ही पीने का मजा देती हैं
पा तो सकता हूं मुक्कमल उसे जमाने से
पर जो आशाएं हैं जीने का मजा देती हैं
2
वक्त से पहले जो अपनों को खोया हो
हद से भारी बोझ दिलों पर ढोया हो
उसका दर्द समझ सकता है क्या कोई
जो खुशियों में खून के आंसू रोया हो

विवेक यादव ‘ अज्ञानी ‘


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