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भागवत कथा में सुनाया पूतना के उद्धार का प्रसंग

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भागवत कथा में सुनाया पूतना के उद्धार का प्रसंग

बिल्सी। मोहल्ला संख्या पांच के शिव शक्ति भवन मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पांचवें दिन कथा व्यास आचार्य उमंग दीक्षित ने कृष्ण जन्मोत्सव और पूतना उद्धार की कथा सुनाई। कथा में जैसे ही भगवान का जन्म हुआ पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की के जयकारों से गूंज उठा। कथावाचक ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्णपक्ष अष्टमी को रात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ। भगवान कृष्ण ने संसार को अंधेरे से प्रकाश में लाने के लिए जन्म लिया और अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञानरूपी प्रकाश से दूर किया। भगवान कृष्ण को जब वासुदेव यशोदा मैया के घर लेकर जा रहे थे तो शेषनाग ने छाया की और मां यमुना ने चरण छुए। वासुदेव कृष्ण को नंदबाबा के घर छोड़कर यशोदा मैया की कन्या को लेकर वापस कंस के कारागृह में आए। इसके बाद कथा व्यास ने पूतना के उद्धार का प्रसंग सुनाया। इस मौके पर यहां काफी लोग मौजूद रहे।


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