इंद्र का अहंकार चूर करने को श्रीकृष्ण ने उठाया गोवर्धन पर्वत
बिल्सी के भवन मंदिर में भागवत कथा का छठा दिन
बिल्सी। भगवान सभी का अहंकार तोड़ते हैं। इसलिए मानव को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। जीवन में आगे बढ़ जाने का कभी घमंड न करें। देवताओं के राजा इंद्र का अहंकार भी भगवान के समक्ष नहीं चला। यह विचार बुधवार को मोहल्ला संख्या पांच स्थित शिव शक्ति भवन मंदिर में चल रही भागवत कथा में कथा व्यास आचार्य उमंग दीक्षित ने गोवर्धन महत्व का प्रसंग सुनाते हुए व्यक्त किए।
उन्होनें कहा कि जब बृजवासी इंद्र की पूजा करने की तैयारी कर रहे थे, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें रोका और इंद्र की जगह पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए कहा। क्योंकि यह पर्वत उनके पशुओं का भरण पोषण करता था। इसके बाद लोगों ने श्रीकृष्ण की सलाह पर इंद्र की पूजा की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू की। अपना अपमान होता देख इंद्र कुपित हो गए और उन्होंने क्रोध के वशीभूत होकर वहां मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। प्रलय के समान वर्षा देखकर सभी बृजवासी भगवान कृष्ण को कोसने लगे कि सब उनके कहने से हुआ है। तब मुरलीधर ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर पूरा गोवर्धन पर्वत उठा लिया। इसके बाद सभी बृजवासी उसके नीचे अपने गाय और बछडे समेत शरण लेने के लिए आ गए। इंद्र कृष्ण की यह लीला देखकर और क्रोधित हो गया। कथावाचक ने यहां अन्य प्रसंगों को भी सुनाया। इस मौके पर काफी महिलाएं मौजूद रही।
Budaun Amarprabhat