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मृत शिक्षामित्रों के परिवार को आर्थिक सहायता तथा एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

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बदायू आज शुक्रवार को जनपद बदायूं में प्रदेश नेतृत्व के आवाहन पर उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ जनपद बदायूं द्वारा पंडित मदन मोहन मालवीय अध्यापक आवास गृह पर एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष अमित शर्मा ने की तथा बैठक का संचालन अनिल यादव जिला संगठन मंत्री के द्वारा किया गया |
जनपद बदायूं में मृतक शिक्षामित्रों को श्रद्धांजलि दी गई और 2 मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था एवं शिक्षामित्रों की समस्याओं को लेकर माननीय मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा गया। तथा शिक्षामित्र पदाधिकारी से शिक्षामित्र की विभिन्न समस्याओं और उनके समाधान के संबंध में चर्चा की गयी |
जिलाधिकारी महोदय की व्यवस्था के अनुसार सिटी मजिस्ट्रेट श्री सुरेश पाल सिंह नें कार्यक्रम स्थल पर आकर ज्ञापन लिया और माननीय मुख्यमंत्री महोदय को भेजने का आश्वासन दिया |
ज्ञापन में शिक्षामित्रों का नियमितीकरण, सम्मानजनक मानदेय, एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ देने की बात कही गई |

जिला अध्यक्ष अमित कुमार शर्मा ने कहा-
हम शिक्षामित्र 25 वर्षों से न्यूनतम मानदेय में कार्यरत हैं। वर्तमान समय में ₹10,000 प्रतिमाह की दर से बर्ष में 11 माह का मानदेय‌मिल रहा है , इस‌ अल्प मानदेय‌ में जीवन यापन करना असंभव हो गया है। उत्तर प्रदेश सरकार को भी उत्तराखण्ड,हिमाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड और राजस्थान जैसे राज्यों की नीति अपनानी चाहिए जिससे शिक्षामित्रों को स्थायित्व और सम्मान मिल सके।

जिला महामंत्री रहीस अहमद ने कहा कि—

सरकार को चाहिए कि शिक्षामित्रों को ईपीएफ, आयुष्मान योजना, और मृत्यु की स्थिति में परिवार को सहायता जैसी बुनियादी सुविधाएँ तत्काल उपलब्ध कराए। शिक्षामित्रों ने दशकों तक शिक्षा का भार उठाया है, अब सरकार का दायित्व है कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा दे।

जिला सचिव धर्मपाल सिंह राजपूत ने कहा—
मानदेय 2017 से अब तक स्थिर है जबकि महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है। हमारी मांग है कि महंगाई सूचकांक के अनुसार मानदेय में वृद्धि हो, और शिक्षामित्रों को केवल अस्थायी कर्मी न मानकर एक सम्मानजनक कर्मचारी के रूप में देखा जाए।

जिला मीडिया प्रभारी ने श्याम निवास राजपूत बताया कि
“आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण मानसिक अवसाद, बीमारी , दुर्घटना एवं आत्महत्या के कारण अब तक जनपद में 60 से अधिक तथा प्रदेश में 10000 से अधिक शिक्षा मित्रों की मौत हो चुकी है किसी भी शिक्षामित्र की मृत्यु के उपरांत उनके परिवार को कोई भी सहायता नहीं दी जा रही है मृतक शिक्षामित्र के परिवार भुखमरी के कगार पर हैं |

मृदुलेश यादब प्रदेश उप मन्त्री नें शिक्षामित्रों की मुख्य माँगे मांगोंके संबंध में प्रकाश डाला

1.शिक्षामित्र को नियमित किया जाए और नियमित किए जाने तक मानदेय को महंगाई सूचकांक के अनुसार बढ़ाया जाए |

2.मूल विद्यालय से वंचित शिक्षा मित्रों को पुनः मूल विद्यालय/ उनकी ग्राम पंचायत के अन्य विद्यालय में समायोजित करने की अनुमति प्रदान करें।

3.महिला शिक्षामित्रों को विवाहोपरान्त उनकी ससुराल के जनपद में समायोजित किया जाये।

4.शिक्षामित्रों को ई०पी०एफ० योजना में शामिल किया जाये।

5.शिक्षामित्रों को आयुष्मान योजना में शामिल करते हुए मेडिकल सुविधा प्रदान की जाय।

6.मृत शिक्षामित्रों के परिवार को आर्थिक सहायता तथा एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशभर में आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।

इस अवसर पर शमीम हुसैन कादरी जिला प्रवक्ता, अनिल यादव जिला मंत्री,ओमवीर सिंह यादव,जगतपाल सिंह,भुवनेन्द्र पाल,,मोहम्मद उमर, पुष्पेन्द्र सिंह, राकेश चंद शर्मा, रामचरण, कुलदीप सिंह,
प्रेमपाल सिंह, राजेश्वर सिंह, असलम खान, राकेश कुमार, गंगा प्रसाद,मनोज कुमार,गीता रानी, मीना देवी वर्मा , पूनम देवी आदि शिक्षामित्र पदाधिकारी उपस्थित रहे |


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