चातुर्मास में सभी को भगवान की वाणी सुनना चाहिए : आचार्य रूप
बिल्सी के गुधनी में आयोजित किया गया सत्संग
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी में आर्य समाज के तत्वावधान में रविवार को साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया। वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने यज्ञ करते हुए कहा कि श्रवण से श्रावण हुआ है जिसका अर्थ है सुनना। हमें चातुर्मास में भगवान की वाणी वेद को सुनना चाहिए। जो कल्याणकारी है। उन्होंने कहा कि भगवान कहते हैं मैं हर मनुष्य के शरीर के अंदर वैसे ही रहता हूं जैसे आत्मा। शरीर में आत्मा रहती है और आत्मा के अंदर मैं रहता हूं। इसलिए मैं हर पल सबके साथ रहता हूँ और सबके अच्छे बुरे कर्मों को देखता हूं। जब भी कोई अच्छा काम करता है तो उसकी आत्मा में मैं उत्साह निर्भयता पैदा करता हूं तथा जब भी कोई व्यक्ति गलत काम करता है तब मैं उसकी आत्मा में भय शंका और लज्जा के भाव पैदा करता हूं। ऐसा इसलिए करता हूँ कि कोई पाप ना करें। क्योंकि पाप करने वाला व्यक्ति दुर्बल हो जाता है और उसका पतन हो जाता है। पाप करने वाला व्यक्ति न केवल मेरी नजर में गिर जाता है बल्कि समाज की नजरों में भी गिर जाता है। भगवान कहते हैं कि मैं दंड देकर मनुष्य को सुधारता हूँ इसलिए जब भी कोई दुख मिले कष्ट मिले पीड़ा मिले तो समझ लेना चाहिए कि कोई पाप कर्म फला है। यहां प्रश्रय आर्य जय ने सुन्दर भजन सुनाए। इस मौके पर सूरजवती देवी, संतोष कुमारी, कमलेश रानी, मोना रानी, ईशा आर्य, राकेश आर्य, नीरेश आर्य, विशेष आर्य आदि मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat