पापी दुर्योधन का अन्न नहीं खाया भगवान कृष्ण ने: तृप्ति शास्त्री
गांव गुधनी में हुआ साप्ताहिक सत्संग
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी में आर्य समाज के तत्वावधान में रविवार को साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया। वैदिक विदुषी आचार्या तृप्ति शास्त्री ने यज्ञ कराते हुए कहा कि भगवान कृष्ण का 5252 वाँ जन्मोत्सव हम सब ने मनाया। इतने वर्षों बाद भी भगवान कृष्ण को सब याद करते हैं। आज भी भगवान कृष्ण प्रासंगिक है। इसका कारण है भगवान कृष्ण वह महामानव वह परम योगी थे जिन्होंने जीवन में कोई पाप नहीं किया था। जिन्होंने मनुष्य होकर मनुष्य का धर्म निभाया, वेद के नीतियों को अपनाया और सारे संसार को धर्म का संदेश दिया। भगवान कृष्ण की विशेषता थी, उन्होंने सज्जनों को कभी छेड़ा नहीं और पापियों को कभी छोड़ा नहीं। सदा औरों को सुख दिया, कभी किसी का राज नहीं हड़पा, महाबलशाली किंतु पापी दुर्योधन का अन्न नहीं खाया जबकि गरीब मित्र सुदामा के पांव धो करके उनका सत्कार किया। भजन गायक पुरोहित पं प्रश्रय आर्य जय ने कहा कि हमारी संस्कृति सर्वश्रेष्ठ है, हमारी संस्कृति के दो मूल आधार है स्वाहा और इदन्नमम्। स्वाहा का अर्थ होता है त्याग और समर्पण। इदन्नमम् का अर्थ होता है मेरा कुछ नहीं है सब कुछ ईश्वर का है। जो व्यक्ति त्याग पूर्ण जीवन जीता और सदा प्राप्त साधनों को परमेश्वर का समझता है वही महामानव होता है, मोक्ष अधिकारी होता है। इस मौके पर दुर्वेश कुमार सिंह, दया शर्मा, संतोष कुमारी, सुराजावती देवी, राकेश आर्य, अशोक पाल सिंह, नीरेश कुमार आर्य, ईशा आर्य, मोना आर्य, कौशिकी आर्य तथा आर्य संस्कारशाला के बच्चे मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat