शुभ संकल्प ही स्वस्थ, सुखी और सबल बनाते हैं: आचार्य रूप
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी में स्थित आर्य समाज मंदिर पर रविवार को साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया। इसमें सुंदर यज्ञशाला में वैदिक मन्त्रों से देश की समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ यज्ञ कराया गया। जिसमें कई लोगों को आहुतियां दी। अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने कहा कि हमारी सब प्रकार की उन्नति का मूल हमारे संकल्प होते है। संकल्प का अर्थ होता है किसी भी कार्य को पूरे मन से करने का निश्चय। संकल्प जितने दृढ़ होते हैं, शुभ होते हैं, शिव होते हैं उतना ही जीवन में सुख शांति और आनंद होता है। विकल्प सदा सज धज कर आते हैं और जिनके संकल्प कमजोर होते हैं। उनके संकल्पों को खा जाते हैं। जैसे व्यक्ति संकल्प करता है कि नित्य सुबह जल्दी उठा करूंगा, रोज माता-पिता का चरण वंदन करूंगा, झूठ नहीं बोलूंगा, चोरी नहीं करूंगा आदि। किंतु आलस्य प्रमाद और लोभ रूपी विकल्प सुखदाई बनकर आ जाते हैं व्यक्ति को आराम अच्छा लगता है, बुराई शीघ्र सुखदाई दिखाई देती है। वह सही मार्ग छोड़ देता है और इस तरह व्यक्ति के संकल्प नष्ट हो जाने पर व्यक्ति भी नष्ट हो जाता है। पंडित प्रश्रय आर्य जय ने यज्ञ कराया तथा सुंदर भजन गाए। इस मौके पर अगरपाल सिंह, अशोक पाल सिंह, सुखबीर सिंह, कमलेश, गुड्डू रानी, सरोजा देवी, ईशा आर्य, कौशिकी रानी, मोना रानी आदि मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat