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बिल्सी में राजा परीक्षित का प्रसंग सुनकर धन्य हुए लोग

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बिल्सी में राजा परीक्षित का प्रसंग सुनकर धन्य हुए लोग

बिल्सी। कछला रोड स्थित ज्वाला प्रसाद जैन स्कूल में सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री रामचन्दाचार्य जी महाराज ने राजा परीक्षित की कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि राजा परीक्षित को श्रृंगी ऋषि का श्राप लगा था और वह श्राप मूर्त रूप होने जा रहा है शाम के समय परम गुरु शुकदेव ने राजा को उपदेश देते हुए कहा कि राजन जिस तरह घड़े में आकाश होता है और घड़े के फूटने पर वह आकाश महाआकाश से मिल जाता है वैसे ही आत्मा जब शरीर से निकल जाती है तो परमात्मा से मिल जाती है। अपना मन परमात्मा में लगाओ भगवान की कथाओं का चिंतन करो, तुम्हारी मृत्यु नहीं मुक्ति होगी। कथावाचक ने व्यास ने कहा कि शुकदेव के विदा होते ही तक्षक के स्पर्श से परीक्षित का शरीर जलकर भस्म हो गया, आकाश से पुष्प वर्षा हुई। परीक्षित को मुक्ति श्रीमद्भागवत कथा सुनने से प्राप्त हो गई। इस मौके पर महंत मटरुमल शर्मा महाराज, दीपक माहेश्वरी, सौरभ सोमानी, जितेंद्र कुमार, गोरेलाल शर्मा, आशीष वाष्र्णेय, सुवीन माहेश्वरी, अनीता माहेश्वरी, सुभाष चन्द्र बाहेती, शरद माहेश्वरी, रंजन माहेश्वरी, विशाल भारत खासट, डा.राजाबाबू वाष्र्णेय, अनूप माहेश्वरी, निशांत, नीरज, सरिता, मोहित देवल आदि मौजूद रहे।


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