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मनुष्य ग्रहों के कारण नहीं कर्मों के कारण सुखी दुखी होता है : रूप*

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*मनुष्य ग्रहों के कारण नहीं कर्मों के कारण सुखी दुखी होता है : रूप*

बिल्सी तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया ! वैदिक विदुषी आचार्य तृप्ति शास्त्री ने यज्ञ कराया !सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने कहा “मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना होता है ! यदि आप जन्म लेते ही धनवान माता-पिता के घर पैदा होते हैं अथवा माता-पिता की कमाई संपत्ति आपको मिलती है तो यह आपको यूं ही नहीं मिल गई यह इसलिए मिली है क्योंकि पिछले जन्म में आपने धन का सदुपयोग किया, दान किया परोपकार किया मेहनत और ईमानदारी से धन कमाया ! इसके विपरीत यदि आप दरिद्र माता-पिता के घर में जन्म लेते हैं और माता-पिता के ऊपर चढ़े ऋण को उतारते रहते हैं तो इसका सीधा अर्थ होता है आपने पिछले जन्म में घोटाला किया लोगों को लूटा, छल कपट किया बेईमानी की ! मनुष्य सुखी और दुखी ग्रहों के कारण नहीं होता अपने अच्छे बुरे कर्मों के कारण होता है ! आचार्या तृप्ति आर्य ने कहा ” कितने दुःख का विषय है कि राम रावण को भी अब जाति से मान रहे है ! इस देश में ही कुछ लोग राम के पुतले जला रहे हैं और कुछ लोग कह रहे हैं कि रावण ब्राह्मण था अतः रावण के पुतले को नहीं जलाना चाहिए ! सच यह है कि रावण अन्याय का प्रतीक है और राम न्याय तथा पवित्रता के ! इस अवसर पर कु मोना रानी ,अगरपाल सिंह , राकेश आर्य , सत्यम आर्य , श्रीमती सूरजवती देवी , संतोष कुमारी आदि मौजूद रहे ।


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