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श्री श्री 1008 विदेहनदिनी शरण जी महाराज सोई आश्रम की असीम कृपा से चल रहे सात दिवसीय श्री मारुति नंदन महायज्ञ एवं श्रीराम कथा

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बिसौली। श्री श्री 1008 विदेहनदिनी शरण जी महाराज सोई आश्रम की असीम कृपा से चल रहे सात दिवसीय श्री मारुति नंदन महायज्ञ एवं श्रीराम कथा में वैदिक आचार्यों ने मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ कुंड में आहुतियाँ अर्पित कीं। धूप, दीप, नैवेद्य और पुष्पों से सुसज्जित यज्ञमंडप में भक्ति और पवित्रता का दिव्य वातावरण व्याप्त रहा।
कथा व्यास पूज्य पं. राधेश्याम जी महाराज (सतना, मध्यप्रदेश) ने श्रीराम कथा के तृतीय दिवस में मां भगवती सती के वियोग, भगवान भोलेनाथ के विरह, माता पार्वती के रूप में पुनर्जन्म तथा शिव-पार्वती के पुनर्मिलन की पावन कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। उनके ओजस्वी वचनों और मधुर वाणी ने श्रद्धालुओं को भक्ति में मग्न कर दिया। कथा के दौरान “हर हर महादेव” और “जय श्रीराम” के उद्घोषों से पूरा वातावरण भक्तिरस से गूंज उठा। कथा का आयोजन महंत श्री फुलबाबा शरण जी महाराज के सान्निध्य एवं निर्देशन में आयोजन मंडल द्वारा अत्यंत श्रद्धा और भव्यता के साथ किया जा रहा है। प्रत्येक संध्या मंगला आरती के पश्चात होने वाली रामकथा में न केवल सोई आश्रम के भक्त बल्कि आसपास के ग्रामों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागी हो रहे हैं। संध्याकालीन कथा का समापन जय श्रीराम और हनुमानजी महाराज की जयघोषों के साथ हुआ, जिससे सम्पूर्ण वातावरण भक्ति और आनंद की तरंगों से भर गया। इस पावन अवसर पर यजमानों के साथ पप्पू बाबा, धर्मदास बाबा, देवानंद बाबा, करुणा शरण महाराज, राजपाल बाबा, वीरपाल बाबा, विनोद पचौरी, सुभाष चंद्र गुप्ता, लटूरी सिंह, सत्यपाल यादव, महावीर सिंह सहित असंख्य श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित रहे।


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