ककोड़ा मेला में मां गंगा को समर्पित कवि सम्मेलन, श्रोताओं ने लिया मंत्रमुग्ध अनुभव
बदायूँ के वरिष्ठ कवियों ने सुनाई आध्यात्मिक कविताएँ, रचनाकारों का सम्मान किया गया
ककोड़ा (बदायूँ)। पतित पावनी मां भागीरथी के पावन तट पर मेला ककोड़ा के पावन अवसर पर हार्टफुलनेस ध्यान शिविर के समापन अवसर पर मां गंगा को समर्पित कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम युवा भाजपा नेता अवधेश राठौर ग्राम दहेमी के सौजन्य से संपन्न हुआ।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ अतिथियों ने माता सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में बदायूँ जनपद के वरिष्ठ कवियों और गजलकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में प्रमुख कवियों की प्रस्तुतियाँ:
शैलेन्द्र देव ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
चंद्रपाल सरल ने सुनाया –
“गंगा के पावन चरणों ने कर दिया धरा को हरा भरा,
क्या कल कल करती भगीरथी सरगम तो इसकी सुनो ज़रा।”
अरविंद धवल ने कहा –
“गंगा नदी नहीं, संस्कृति है, भारत मां का प्राण है गंगा,
रोग शोक भव भय इन सब से, जन मानस का तृाण है गंगा।”
सुनील शर्मा समर्थ ने अपनी कविता में भारत की तपोभूमि की भव्यता का चित्र प्रस्तुत किया।
सुरेन्द्र नाज़ ने कहा –
“वो यमुना, नर्मदा, गोदावरी, सतलज या नंदा हो,
सभी ने सीखी बहने की अदा गंगा के पानी से।”
कामेश पाठक ने श्रोताओं से गंगा मां के प्रति भक्ति और ध्यान का संदेश दिया।
शैलेन्द्र मिश्र देव ने पढ़ा –
“निर्धन या धनवान सभी को पास बुलाती है गंगा,
अपने जल का अमृत देकर प्यार दिखाती है गंगा।”
मुख्य अतिथि के रूप में राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलापूर्ति अधिकारी आरके मिश्र ने की। आयोजन में अवनेश्वर सिंह पटेल, लखन सिंह, संजीव सिंह, अनुज, संतोष कुमारी, डॉ. रक्षपाल सिंह और अमित कुमार सिंह का विशेष योगदान रहा।
कवि सम्मेलन के सभी रचनाकारों को माला पहनाकर और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन कवि कामेश पाठक ने किया।
मंच और पंडाल में देर रात तक भक्ति और काव्य रस का अनुपम संगम बना रहा, जहां श्रद्धालु और श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर कवियों की प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे।
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🟠 (संवाददाता | ककोड़ा, बदायूँ)
Budaun Amarprabhat