संवाददाता : डॉ. राशिद अली खान, सहसवान (बदायूं)।
सहसवान तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार व्याप्त होने के आरोपों को लेकर अधिवक्ताओं और एसडीएम के बीच गुरुवार को विवाद और नोकझोंक हो गई। अधिवक्ताओं का कहना है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ ज्ञापन देने पहुंचे थे, तभी एसडीएम से कहासुनी हो गई।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गई और स्थिति को शांत कराया गया। इसके बाद अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की।
बार एसोसिएशन की ओर से राजस्व परिषद अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अधिवक्ताओं ने तहसील कार्यालयों में भ्रष्टाचार के संबंध में 31 अक्टूबर, 3, 4, 11 और 12 नवंबर को एसडीएम को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप लगाया गया कि एसडीएम ने कार्रवाई करने के बजाय कर्मचारियों का पक्ष लिया, जिससे नाराज़ होकर 12 से 15 नवंबर तक तहसील के राजस्व न्यायालयों के बहिष्कार का निर्णय लिया गया।
13 नवंबर को एसडीएम के समक्ष समस्या रखे जाने पर, अधिवक्ताओं का आरोप है कि उन्होंने दुर्व्यवहार करते हुए अपशब्द कहे, जिससे आक्रोश फैल गया और अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर के बाहर प्रदर्शन कर नारेबाजी की।
बार एसोसिएशन ने अपने पत्र में भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों के स्थानांतरण और कार्रवाई की मांग की है।
इस मौके पर बार अध्यक्ष नेम सिंह यादव, महासचिव संदीप सक्सेना, जितेंद्र सिंह यादव, मुजफ्फर सईद, श्यामबाबू सक्सेना, सैयद जावेद इकबाल, अनेकपाल सिंह, रागिब अली, सोमवीर यादव, अक्षत सक्सेना, प्रीति सक्सेना आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।
इस संबंध में एसडीएम साईं आश्रित साखमुरी ने बताया कि अधिवक्ताओं ने तहसील में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था, तो उनसे संबंधित अधिकारी या कर्मचारी का नाम बताने और वार्ता करने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा कि अभद्रता और अपशब्द कहने का आरोप निराधार है, तथा तहसील में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार नहीं होने दिया जाएगा।
Budaun Amarprabhat