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एपीएस इंटरनेशनल स्कूल में ‘विद्योत्सव’ मनाया गया, रंग-रंगीलें कार्यक्रमों से सजा मंच

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संवाददाता — गोविंद देवल, उझानी

एपीएस इंटरनेशनल स्कूल में शनिवार को सांस्कृतिक उत्सव ‘विद्योत्सव’ धूमधाम के साथ मनाया गया। पूरे कार्यक्रम में बच्चों की उमंग, उल्लास और जोश देखने लायक था। विविधताओं और परंपराओं से सजा यह उत्सव कला, संस्कृति और सामाजिक संदेशों का अनोखा संगम बनकर सामने आया।

कार्यक्रम की शुरुआत एपीएस रॉकबैंड आर्केस्ट्रा की दमदार प्रस्तुति से हुई, जिसने दर्शकों का मनोरंजन कर वातावरण को उत्साह से भर दिया। भारतीय परंपरा के अनुसार मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर उत्सव का विधिवत शुभारंभ किया गया। इसके बाद कक्षा 9 व 11 के विद्यार्थियों ने ‘गणेश वंदना’ प्रस्तुत कर ऐसा समां बांधा कि पूरा सभागार ‘बप्पा मोरया’ की गूंज से भर उठा।

पहली थीम : जंगल लाइफ—जीव-जंतुओं से जुड़ाव का संदेश

एनसी से यूकेजी तक के नन्हे विद्यार्थियों ने जंगल थीम पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। हिरण, हाथी, शेर और अन्य जीवों के रूप में बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया। जंगल जैसा मंच-सजावट और संगीत ने प्रस्तुति को जीवंत बना दिया। इसका निर्देशन किंडरगार्टन की अध्यापिकाओं ने किया।

दूसरी थीम : बचपन रंग-बिरंगा

कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों ने बचपन की शरारतें, खेलकूद, दोस्ती और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित विविध प्रस्तुतियां दीं। ‘बैक अप सिड’, ‘मैं ऐसा क्यों हूं’, ‘ला-ला-ला’, ‘जाने क्यों’, ‘एक जिंदगी’ जैसे गीतों पर उनकी हृदयस्पर्शी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बचपन की यादों में ले गया। बच्चों ने नाटक के माध्यम से माता-पिता व शिक्षकों के सम्मान का संदेश भी दिया। इस थीम का निर्देशन प्राथमिक कक्षाओं के शिक्षकों द्वारा किया गया।

तीसरी थीम : भारत की विविधता—रंगों से सजा सांस्कृतिक मंच

कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर उतार दिया। उत्तर भारत का कथक, महाराष्ट्र का गोंदल, पंजाब का गिद्दा व भांगड़ा और दक्षिण भारत के फ्यूजन गीतों पर शानदार प्रस्तुतियों ने सबका मन मोह लिया। पारंपरिक परिधानों और राज्य विशेष के संगीत ने पूरे सभागार को उत्सव की रंगीन छटा से भर दिया।

विशेष आकर्षण : ‘नरसिम्हा’ एक्ट

नरसिम्हा की अद्भुत प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को ‘नारायणमय’ बना दिया। यह प्रस्तुति केवल बुराई के विनाश का प्रतीक नहीं थी, बल्कि ब्रह्मांड में सत्य और विश्वास के संतुलन का संदेश देती नजर आई।

मुख्य अतिथि और आयोजन

अतिथियों ने विद्यार्थियों के उत्साह की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देते हैं।
विद्यालय के प्रधानाचार्य रविंद्र भट्ट ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए शिक्षा, खेल व सहगामी गतिविधियों में मिली उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने अपने संबोधन का समापन एक जोशीली कविता के साथ किया।

कार्यक्रम का संचालन राजीव सिंह ने किया।
इस अवसर पर मुख्य समन्वयक विवेक सिंह, प्रिया राणा, सिम्मी नाज़िर, कला विभाग से रचना यादव, मनोज सक्सेना, अर्चना पांडेय, एनसीसी कैडेट्स के साथ रिधिमा थारेजा, मानसी शर्मा, प्रांजल शर्मा, शिवांगी मोहरश्वरी, अथर्व मिश्रा, आराध्या चांडक, अक्षिता माहेश्वरी, आस्था छाबड़ी, आराध्या भारद्वाज सहित अनेक शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


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