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विश्व में हर चालीस सेकेंड में एक आत्महत्याः प्रो. प्रेरणा

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तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ नर्सिंग में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर अतिथि व्याख्यान की थीम रही- बदलते नजरिए के साथ आत्महत्या पर चर्चा

मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के टीएमयू हॉस्पिटल एंड में मनोविज्ञान विभाग की सीनियर फैकल्टी प्रो. प्ररेणा गुप्ता ने बताया, लगभग हर वर्ष सात लाख लोगों की मृत्यु आत्महत्या से हुई है, जो हर चालीस सेकंड में एक मौत के बराबर है। भारत में उसी वर्ष एक लाख चौसठ हजार से अधिक आत्महत्याएं दर्ज की गईं। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के आधार पर वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर आत्महत्या की स्थिति प्रस्तुत की। उन्होंने उन्होंने बताया, आत्महत्या कई जैविक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित एक सोचा-समझा कदम होता है। बढ़ता तनाव, शैक्षणिक दबाव, नशा, पारिवारिक कलह और सामाजिक अपेक्षाएं आत्महत्या के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने जोखिम कारकों में अवसाद, पुरानी बीमारियां, अकेलापन, पिछले प्रयास और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को महत्वपूर्ण बताया। प्रो. प्रेरणा तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ नर्सिंग में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर आयोजित अतिथि व्याख्यान में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं।
इससे पूर्व मुख्य अतिथि प्रो. प्ररेणा गुप्ता, फैकल्टी ऑफ नर्सिंग की डीन प्रो. एसपी सुभाषिनी, कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्या प्रो. जेसलीन एम., वाइस प्रिंसिपल प्रो. राम निवास, मानसिक स्वास्थ्य नर्सिंग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सुमन वशिष्ठ आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। प्रो. प्ररेणा गुप्ता ने आत्महत्या की रोकथाम के लिए प्रारंभिक पहचान, सहानुभूतिपूर्ण संवाद, संकट में सहयोग, सामुदायिक संसाधनों को मजबूत करना, मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता बढ़ाना और समय पर रेफरल जैसे उपायों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, मानसिक संघर्ष किसी को भी हो सकता है चाहे वह साधारण व्यक्ति हो या कोई प्रसिद्ध व्यक्तित्व।
कॉलेज ऑफ नर्सिंग की डीन प्रो. एसपी सुभाषिनी ने आत्महत्या रोकथाम में नर्सिंग पेशेवरों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नर्सें अक्सर पहले संपर्क बिंदु होती हैं और वे व्यवहार, मनोदशा या निराशा के संकेतों को पहचानकर समय रहते सहायता प्रदान कर सकती हैं। उन्होंने जागरूकता बढ़ाने, कलंक कम करने और सुरक्षित वातावरण बनाने में नर्सों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्या प्रो. जेसलीन एम. ने बदलते नजरिए के साथ आत्महत्या पर चर्चा थीम पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुप्पी और कलंक को दूर करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, आत्महत्या पर खुलकर चर्चा करना रोकथाम की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने छात्रों से अनुरोध किया कि वे अपने सहपाठियों के प्रति संवेदनशील रहें। छोटी-सी मदद या ध्यानपूर्वक सुनना भी किसी के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। प्रो. एम. ने कहा, शिक्षण संस्थानों में ऐसा वातावरण बनाना अत्यंत आवश्यक है, जहां छात्र बिना झिझक सहायता मांग सकें। प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने जोखिम मूल्यांकन, परामर्श तकनीक और हस्तक्षेप उपायों से जुड़े प्रश्न पूछे। सेयमा भटनागर ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में एलन सिंह, श्रीमती एकजोत कौर, सुश्री आरती चौधरी के संग-संग पीबीबीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


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