संवाददाता – गोविंद देवल
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने वैदिक विधि से यज्ञ संपन्न कराया। यज्ञ के उपरांत सत्संग में उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए उन्होंने जीवन के अनुभवों और परिश्रम के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि “संसार में कुछ भी सरल नहीं होता। जैसे पानी को ऊपर पहुँचाने के लिए प्रयास करना पड़ता है, लेकिन नीचे गिराने के लिए कुछ नहीं करना पड़ता। उसी प्रकार कठिन परिश्रम किए बिना किसी को कीर्ति या सुख नहीं मिलता। हाँ, दूसरों के अनुभव से सीखकर व्यक्ति अपने जीवन को सरल बना सकता है। माता-पिता और शुभचिंतक सही मार्गदर्शक होते हैं—उनके अनुभवों का लाभ अवश्य उठाना चाहिए। बुजुर्गों के बाल धूप में सफेद नहीं होते, वे जीवन के लंबे अनुभवों की पहचान हैं।”
सत्संग के दौरान सत्यम आर्य ने भजन “करो इस चिंतन परम सुख मिलेगा” प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इस अवसर पर पंजाब सिंह, श्रीमती संतोष कुमारी, नीरेश आर्य, श्रीमती सूरजवती देवी, बद्री प्रसाद आर्य तथा आर्य संस्कारशाला के बच्चे सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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