
संवाददाता : गोविंद देवल, बदायूं
बदायूं, 1 दिसंबर 2025—
संस्कृत महाविद्यालय वेदामऊ वैदिक विद्यापीठ, बदायूं में आज गीता जयंती का पावन पर्व बड़े हर्षोल्लास और वैदिक गरिमा के साथ मनाया गया। महाविद्यालय के संस्थापक आचार्य वेद व्रत आर्य के संरक्षण में आयोजित इस समारोह में छात्रों, आचार्यों और भक्तजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
गीता जयंती, जिसे हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व माना जाता है, मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी को मनाई जाती है। यह दिन श्रीमद्भगवद्गीता के प्राकट्य का उत्सव है—वह दिव्य उपदेश जो श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्धक्षेत्र कुरुक्षेत्र में अर्जुन को प्रदान किए थे।
“गीता—मानवता का मार्गदर्शक ग्रंथ”
समारोह को संबोधित करते हुए संस्थापक व सनातन धर्म के प्रकांड विद्वान आचार्य वेद व्रत आर्य ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि समूचे मानव समाज को दिशा देने वाला दार्शनिक एवं आध्यात्मिक प्रकाशपुंज है।
उन्होंने बताया कि यह ग्रंथ जीवन के हर पहलू—कर्म, धर्म, भक्ति, त्याग, योग और आत्मज्ञान—पर प्रकाश डालता है। गीता के उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने महाभारत काल में थे।
आचार्यों ने रखे अपने विचार
विद्यालय के प्राचार्य वेद मित्र आर्य ने गीता में वर्णित तीन गुण—सात्त्विक, राजसिक और तामसिक—पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रवक्ता आचार्य शिव सिंह यादव, माध्यमिक विभाग के प्रधानाचार्य महेंद्र पाल सिंह यादव, व्याकरण विभाग के अध्यक्ष आचार्य सर्वेश कुमार गुप्त, तथा आधुनिक विभाग की प्रवक्ता श्रीमती अंकित गुप्ता ने भी गीता जयंती के अवसर पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
सभी वक्ताओं ने गीता के कर्म, धर्म और भक्ति मार्ग को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
समापन
कार्यक्रम का समापन वैदिक शांति पाठ के साथ हुआ। पूरे परिसर में आध्यात्मिकता, भक्ति और वैदिक ऊर्जा का वातावरण पूरे दिन बना रहा।
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