संवाददाता: गोविंद देवल
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा एक मंदिर में रविवार को आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग श्रद्धा एवं वैदिक विधि-विधान के साथ आयोजित किया गया। सत्संग में संसार के उपकार और मानव कल्याण के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई तथा अथर्ववेद के मंत्रों के उच्चारण के साथ यज्ञ संपन्न कराया गया।
इस अवसर पर वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने कहा कि मनुष्य पशु-पक्षियों से इसलिए भिन्न है क्योंकि वह सोच सकता है, सही और गलत का अंतर कर सकता है और अपनी नियति व भाग्य स्वयं बदल सकता है। उन्होंने कहा कि हमारा भाग्य ईश्वर नहीं, बल्कि हम स्वयं अपने कर्मों से लिखते हैं। जब मनुष्य अच्छे कर्म करता है, समाज में फैले अज्ञान और पाखंड को दूर करता है, तब संत और विद्वान बनने के द्वार खुलते हैं। अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने से बलवान बनने का मार्ग प्रशस्त होता है और दान व जरूरतमंदों की सहायता करने से अभाव दूर होते हैं तथा समृद्धि के द्वार खुलते हैं।
यज्ञ कराते हुए पं. प्रश्रय आर्य ने कहा कि खुद के सुधार से ही जग का सुधार संभव है। केवल वाणी से नहीं, बल्कि आचरण से ही वास्तविक प्रभाव पड़ता है।
सत्संग के दौरान डॉ. सत्यम आर्य, कुमारी तृप्ति शास्त्री एवं कुमारी कौशिकी रानी ने भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में राकेश आर्य, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती भावना रानी, कुमारी मोना रानी, श्रीमती कमलेश कुमारी, श्रीमती मुन्नी देवी, श्रीमती सूरजवती देवी सहित आर्य संस्कार शाला के बच्चे एवं अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
Budaun Amarprabhat