संवाददाता: संजीव शर्मा 
उझानी। क्षेत्र के समीपवर्ती गांव बरसुआ में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव के नौवें दिन कथा का समापन भगवान श्रीराम की लीलाओं और राजतिलक के साथ हुआ। कथा पंडाल में सुबह से शाम तक भक्तों का आगमन बना रहा और वातावरण श्रीराम के जयकारों से गूंजता रहा।
कथा शिरोमणि रवि महाराज ने भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, कर्तव्यनिष्ठ जीवन और धर्मप्रधान आचरण पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीराम भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं और उनका जीवन मर्यादा, संयम, त्याग एवं करुणा का ऐसा आदर्श प्रस्तुत करता है, जो प्रत्येक युग के लिए पथप्रदर्शक है।
रवि महाराज ने बताया कि श्रीराम ने पुत्र, भ्राता, पति, मित्र और राजा—हर रूप में लोकमंगल को सर्वोच्च स्थान दिया। उन्होंने रामकथा को सामाजिक मूल्य, सत्य, सहनशीलता और कर्तव्यबोध की प्रेरणा का स्रोत बताया। माता अनसूया द्वारा माता सीता को दिए गए पतिव्रता धर्म और संस्कारों के उपदेश को नारी गरिमा एवं पारिवारिक मूल्यों की आधारशिला बताया गया।
कथा में अगस्त्य मुनि संवाद, दंडक वन की लीलाएं, जटायु से भेंट, सूपनखा प्रसंग, खर–दूषण वध, मारीच वध, सीता हरण, जटायु उद्धार, शबरी मिलन, नारद संवाद, हनुमान से मिलन, राम–सुग्रीव मित्रता, बाली वध एवं उद्धार, हनुमान जी का लंका गमन, लंका दहन, विभीषण का त्याग, समुद्र पर सेतु निर्माण और रामेश्वरम् की स्थापना सहित अनेक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। अंत में रावण के सपरिवार वध और राम के राज्याभिषेक के साथ कथा का समापन हुआ।
भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रोच्चार ने समूचे कार्यक्रम को और भी भक्तिमय बना दिया। रवि महाराज ने कहा कि रामकथा केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि आचरण में उतारने का जीवन दर्शन है। समाज श्रीराम के आदर्शों को अपनाएगा तभी शांति, समरसता और नैतिक मूल्यों की स्थापना संभव होगी।
इस अवसर पर बोर्ड बार काउंसिल उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष शिव किशोर गौड़, डॉ. वीरेन्द्र सिंह, श्रीकृष्ण राणा, संजीव सिसोदिया, प्रशांत एडवोकेट, हरिओम यादव, राष्ट्रीय हनुमान दल के अमित सिसोदिया, मोहित पाठक, भूपेंद्र सिंह, कुलदीप शर्मा, सचिन चौहान, जगवीर कुमार, अनुज मिश्रा, शैलेंद्र यादव, गीता यादव सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
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