लखनऊ।
लखनऊ में वामपंथी और कम्युनिस्ट दलों ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त करने और उसके स्थान पर लाए जा रहे “विकसित भारत–ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन कानून” के विरोध में संयुक्त प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी–लेनिनवादी) लिबरेशन और ऑल इंडिया फ़ॉरवर्ड ब्लॉक के संयुक्त मंच के बैनर तले आयोजित किया गया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के राज्य स्थायी समिति सदस्य एवं लखनऊ जिला प्रभारी कामरेड रमेश सिंह सेंगर ने कहा कि मनरेगा कोई खैरात नहीं, बल्कि ग्रामीण मेहनतकशों का कानूनी अधिकार है। इसे समाप्त कर नया कानून लाना करोड़ों ग्रामीण परिवारों को बेरोजगारी, भुखमरी और पलायन की ओर धकेलने की साजिश है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव कामरेड अविन्ध राज स्वरूप ने कहा कि मनरेगा को खत्म करना और उसके स्थान पर नया कानून लाना सरकार की गहरी जनविरोधी सोच को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कॉरपोरेट हितों के लिए मजदूरों और किसानों के अधिकारों को कमजोर कर रही है।
सीपीआई(एम) और फ़ॉरवर्ड ब्लॉक के नेताओं ने भी प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जिससे गरीब परिवारों को न्यूनतम रोजगार और सम्मानजनक जीवन का सहारा मिलता है। इसे कमजोर करने का मतलब ग्रामीण भारत को और अधिक संकट में डालना है।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मनरेगा को मजबूत करने, समय पर मजदूरी भुगतान और काम के दिनों में बढ़ोतरी की मांग की। वाम दलों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मनरेगा को खत्म करने का फैसला वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
Budaun Amarprabhat