
बिल्सी | संवाददाता गोविंद देवल
तहसील क्षेत्र के गांव गड़रपुरा में आयोजित भगवान बुद्ध की कथा के पांचवें दिन कथावाचक श्याम सुंदर बौद्ध ने डाकू अंगुलिमाल के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि किस प्रकार हिंसा और क्रूरता के मार्ग पर चलने वाला अंगुलिमाल भगवान बुद्ध की करुणा, अहिंसा और उपदेशों से प्रभावित होकर अपने जीवन में परिवर्तन लाता है।
कथावाचक ने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश आज भी समाज के लिए पूरी तरह प्रासंगिक है। अंगुलिमाल के उदाहरण के माध्यम से उन्होंने समझाया कि कोई भी व्यक्ति कितना ही भटका हुआ क्यों न हो, यदि वह सच्चे मन से आत्मचिंतन कर सदमार्ग अपनाता है तो उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। बुद्ध की करुणा ने अंगुलिमाल को हिंसा के मार्ग से हटाकर मानवता और सेवा के पथ पर अग्रसर किया।
कथा के दौरान श्रोताओं ने शांत भाव से प्रवचन सुना और भगवान बुद्ध के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
इस मौके पर कथावाचक राजेश्वरी बौद्ध के अलावा आयोजक हरवीर शाक्य, चन्द्रपाल, किशन पाल, मोहनलाल, हरविलास, पानसिंह, सुनील कुमार, श्यामवीर, रामवीर, शिशुपाल सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
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