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बदायूँ : प्रदेश सरकार का किसानों के कल्याण और कृषि विकास पर विशेष जोर

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संवादाता गोविन्द देवल
बदायूँ। प्रदेश सरकार किसानों को सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रति कृत संकल्पित है। सरकार का मानना है कि जब अन्नदाता किसान समृद्ध होगा, तब प्रदेश और देश भी समृद्ध बनेंगे। विगत 8 वर्षों से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ लगातार मिल रहा है और किसान अपनी उपज सीधे क्रय केंद्र में बेच सकते हैं, जिससे बिचौलियों का दखल समाप्त हुआ है।
प्रदेश में किसानों को स्वॉयल हेल्थ कार्ड और फसल बीमा जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। गन्ने का मूल्य ऐतिहासिक रूप से भुगतान किया जा रहा है। कृषि मंडियों और गांवों तक सड़क नेटवर्क का विस्तार, वैल्यू चेन स्टोरेज एवं प्रोसेसिंग में निवेश, किसानों को बाजार और निर्यात से जोड़ने, सिंचाई की सुविधा, नहरों, पाइपलाइन, माइक्रो इरीगेशन और सोलर पंप के माध्यम से जल संरक्षण अभियान, ड्रोन डोजिंग, सौर ऊर्जा, एफपीओ और स्टार्टअप्स आधारित फसल एवं मूल्य संवर्धन जैसी योजनाओं से सीधे किसानों को लाभ मिल रहा है।
कृषि क्षेत्र में खरपतवार नियंत्रण, स्वॉयल टेस्टिंग और प्राकृतिक खेती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसानों को कृषि में उद्यमिता के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल मंडी जैसी सुविधाओं के माध्यम से युवाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। एक्सप्रेस-वे और लॉजिस्टिक्स पार्क से किसानों की उपज को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहुंचाने में मदद मिल रही है।
प्रदेश में विश्व बैंक के सहयोग से ‘यू0पी0 एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूलर इंटरप्राइजेज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग प्रोजेक्ट’ (यू0पी0 एग्रीज परियोजना) प्रारंभ हो चुकी है। इस परियोजना के तहत प्रदेश के कम कृषि ग्रोथ वाले 28 जनपदों को 4,000 करोड़ रुपये की लागत से छह वर्षों में शामिल किया गया है। बुंदेलखंड के जनपद पहले जल संकट से प्रभावित थे, अब वहां पर्याप्त जल संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।
तकनीक के माध्यम से किसानों को जोड़ने के लिए ओ0डी0ओ0पी0 योजना, एस0एच0जी0, बी0सी0 सखी और ड्रोन दीदियां जैसी पहल गांव-गांव रोजगार और स्थानीय उद्यम का सशक्त माध्यम बनी हैं। प्रदेश के 9 क्लाइमेटिक जोन के अनुसार किसानों को तकनीक और बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ डीबीटी के माध्यम से पारदर्शी तरीके से मिल रहा है।
प्रदेश में 122 चीनी मिलें संचालित हो रही हैं और एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर हो गया है, जो देश में प्रथम स्थान पर है। आलू, केला, ऑर्गेनिक फसल, फल और सब्जियों के उत्पादन में भी प्रदेश ने अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। गन्ना किसानों के लिए एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
प्रदेश के किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का सबसे अधिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं, जिसमें 2 करोड़ 86 लाख किसान जुड़े हैं। उन्नत बीज उपलब्ध कराने के लिए भारत रत्न चौधरी चरण सिंह सीड पार्क लखनऊ में निर्माणाधीन है। प्रदेश में 79 कृषि विज्ञान केंद्र सक्रिय हैं और शेष 10 पर तेजी से काम किया जा रहा है, जिनमें आधुनिक तकनीक और फसल प्रदर्शन की सुविधा उपलब्ध है। कई केंद्र ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में कार्यरत हैं।


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