संवाददाता: काजल मिश्रा
तिलहर, शाहजहांपुर। भारतीय कृषक दल (बीकेडी) के बैनर तले किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर तहसील परिसर के निकट चल रहा सत्याग्रह लगातार नौवें दिन भी जारी रहा। आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण और स्थानीय लोग शामिल हुए। इस दौरान किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग दोहराई।
सत्याग्रह को संबोधित करते हुए बीकेडी के राष्ट्रीय महासचिव प्रमोद यादव “जनसेवक” ने तहसील प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी जनता की समस्याएं सुनने और उनका समाधान करने में असमर्थ हैं, उन्हें कुर्सी पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। ऐसे अधिकारियों को तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी जनता के टैक्स के पैसों से वेतन लेते हैं, इसलिए उनका पहला कर्तव्य जनता की सेवा करना और सरकार की योजनाओं को ईमानदारी से लागू करना है।
प्रमोद यादव ने धान खरीद और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर कथित घोटाले पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जबकि कागजों में पूरी खरीद दिखाकर आंकड़े पूरे किए जा रहे हैं। यह किसानों के साथ धोखा और सरकारी योजनाओं का खुला दुरुपयोग है। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार ने भ्रष्टाचार की कोई छूट नहीं दी है, तो फिर तहसील क्षेत्र में ऐसी अनियमितताएं कैसे हो रही हैं।
उन्होंने छुट्टा आवारा गाय और सांडों की समस्या को भी गंभीर बताया। कहा कि इससे किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और किसान रात-दिन खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं, लेकिन प्रशासन इस समस्या के प्रति उदासीन बना हुआ है। गौशालाओं की स्थिति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वहां आने वाला चारा-दाना वास्तव में गौवंश तक पहुंच रहा है या फिर अधिकारियों की मिलीभगत से कहीं और खपाया जा रहा है।
प्रमोद यादव ने कहा कि तहसील से जुड़ी राजस्व समस्याएं, स्थानीय विवाद और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दे यदि एसडीएम, तहसीलदार और बीडीओ नहीं सुनेंगे, तो आम जनता आखिर किसके पास जाए। प्रशासन के इस जनविरोधी और कथित भ्रष्ट रवैये से जनता में भारी आक्रोश है और शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास कमजोर होता जा रहा है।
बीकेडी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी तहसील प्रशासन की होगी।
Budaun Amarprabhat