गोविंद देवल, संवाददाता
बिसौली। शरह बरौलिया में राम कथा के आयोजन के बीच प्रसिद्ध कथा वाचक प्रेम मूर्ति पंकज मिश्र ने अपने साक्षात्कार में राम कथा के आध्यात्मिक, सामाजिक और नैतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा मानव जीवन को मर्यादा, सेवा और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर करने वाली दिव्य प्रेरणा है।
साक्षात्कार में पंकज मिश्र ने कहा:
प्रश्न: राम कथा आपके लिए क्या है?
पंकज मिश्र: श्रीराम कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि मानव जीवन का सम्पूर्ण दर्शन है।
प्रश्न: आप कहते हैं कि “राम कथा समाज को जोड़ती है”, इसका क्या आशय है?
पंकज मिश्र: राम कथा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह वर्ण, वर्ग, भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से परे सभी को जोड़ती है। राम केवल अयोध्या के नहीं, बल्कि जन-जन के आराध्य हैं।
प्रश्न: आज के तनावग्रस्त और भौतिकवादी युग में राम कथा कैसे मार्गदर्शन करती है?
पंकज मिश्र: आज मनुष्य के पास साधन तो हैं, पर शांति नहीं। श्रीराम कथा बताती है कि संतोष, कर्तव्य और संयम ही वास्तविक सुख का आधार हैं।
प्रश्न: युवा पीढ़ी के लिए श्रीराम कथा का क्या महत्व है?
पंकज मिश्र: यदि युवा वर्ग श्रीराम के जीवन से कुछ सीख ले तो उनका जीवन स्वतः संवर सकता है। आज के युवाओं को आत्मनियंत्रण की सबसे अधिक आवश्यकता है।
प्रश्न: रामराज्य की अवधारणा को आप कैसे परिभाषित करेंगे?
पंकज मिश्र: रामराज्य किसी राजनीतिक व्यवस्था का नाम नहीं, बल्कि न्याय, करुणा और उत्तरदायित्व की भावना है। जहां शासक स्वयं को सेवक माने, वही रामराज्य है।
प्रश्न: समाज और श्रद्धालुओं के लिए आपका संदेश?
पंकज मिश्र: मेरा संदेश सरल है – राम को केवल मंदिर में नहीं, अपने व्यवहार में उतारिए। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्य को रामभाव से निभा ले, तो समाज स्वयं सुंदर बन जाएगा।
पंकज मिश्र ने अंत में कहा कि श्रीराम कथा आस्था, विवेक और सामाजिक चेतना का अनुपम संगम है। इसे सुनने और अपनाने से मानव जीवन में नैतिकता, संयम और सामाजिक सौहार्द बढ़ता है।
Budaun Amarprabhat