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अहंकार व्यक्ति के पतन का कारण बनता है : आचार्य संजीव रूप

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बिल्सी। तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज द्वारा साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वैदिक विदुषी कुमारी तृप्ति शास्त्री ने विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न कराया।
सत्संग को संबोधित करते हुए सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने कहा कि अहंकार व्यक्ति को अधार्मिक बना देता है। मनुष्य में यशस्वी, धनवान, बलवान, रूपवान या विद्वान बनने की स्वाभाविक इच्छा होती है, लेकिन जैसे ही अहंकार उसे घेर लेता है, वहीं से पतन की शुरुआत हो जाती है। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने केवल एक वेद का अध्ययन किया था, माता सीता ने दो और हनुमान जी तीन वेदों के ज्ञाता थे, जबकि रावण चारों वेदों का ज्ञाता था। इसके बावजूद अहंकार के कारण रावण का पतन हो गया और एक वेद पढ़ने वाले श्रीराम आज भी संसार में पूजे जाते हैं, क्योंकि वे धैर्यवान, सरल और संयमी थे।
वहीं कु. आचार्य तृप्ति आर्य ने कहा कि धर्म का अर्थ मत, मजहब या पंथ नहीं होता। धार्मिक वही व्यक्ति है जो सदाचारी, सत्यवादी, सरल, सेवाभावी, निर्लोभी और सच्चरित्र हो। केवल किसी मत-पंथ को मानने से व्यक्ति धार्मिक नहीं बन जाता।
कार्यक्रम में श्रीमती सूरजवती देवी, श्रीमती कमलेश कुमारी, कुमारी ईशा, कुमारी तान्या, विचित्रपाल सिंह, राकेश आर्य, विनीत कुमार सिंह, पंजाब सिंह, पंकज सिंह सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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