Breaking News

सर्दी का ढहता सितम: नन्हीं फसलों और किसानों की चिंता गजानन्द मेहर की नन्हीं कविता से

Spread the love


बूंदी। जनवरी का महीना पूरी तरह मतवाला रहा। देश के कई हिस्सों में सर्दी ने ठिठुरन से लोगों और फसलों को जकड़ लिया है। जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी और दिल्ली में ठिठुरन का कहर बढ़ा हुआ है। राजस्थान के किसान अस्त-व्यस्त जीवन में फसलों की रक्षा में जुटे हैं।
कवि गजानन्द मेहर ने अपनी नन्हीं कविता “सर्दी का ढहता सितम” में इस मौसम और किसानों की परेशानी को बड़ी संवेदनशीलता से व्यक्त किया है:
जनवरी माह हुआ मतवाला,
सर्दी ने ठिठुरन से जकड़ डाला।
जम्मू कश्मीर में बर्फ आई,
दिल्ली में ठिठुरन छाई।
राजस्थान में दुबके लोग,
अस्त-व्यस्त जीवन रहे भोग।
फसलों को देखो कैसे बचाते,
सरसों, धनियां पर पाला पाते।
गेहूं, चना, सर्दी से घबराते,
सरकार किस-किस को बचाते।
नहीं हैं कोई सुध इनकी लेता,
राम जी ही जाने दुःख क्यूं देता।
सर्दी की अठखेलियां देखो,
नन्हीं फसलों की कलियां देखो।
सर्दी से मुर्झाने को हुई मजबूर,
किसानों की आशा होने लगी चकनाचूर।
कविता में गहराई से यह संदेश मिलता है कि सर्दी केवल मौसम नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत और आशाओं पर भी असर डाल रही है।
गजानन्द मेहर, बूंदी (राजस्थान)


Spread the love

About Govind Deval

Check Also

पूर्व छात्र परिषद ने ‘एक वृक्ष मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधारोपण

Spread the love बदायूं। आज विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर स्थानीय विद्यालय में …

error: Content is protected !!