सहसवान (बदायूं)। पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं और घने कोहरे ने सहसवान सहित आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है। शाम ढलते ही दृश्यता लगभग शून्य हो जा रही है, जिससे सड़कों पर चलना दूभर हो गया है। ठंड का असर इतना तीव्र है कि लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं।
इस हाड़ कंपा देने वाली ठंड में सबसे अधिक परेशानी गरीबों, बेसहारा लोगों और राहगीरों को हो रही है, जिनके पास न तो सिर छिपाने की छत है और न ही तन ढंकने के लिए पर्याप्त गर्म कपड़े। खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे लोग सर्दी की मार से जूझ रहे हैं।
इंसानियत का हाथ बढ़ाने की अपील
भीषण ठंड को देखते हुए सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने क्षेत्रवासियों से इंसानियत का परिचय देने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि वे अपने आसपास जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं।
अपील में कहा गया है कि जहां भी बेघर या मुसाफिर दिखाई दें, उनके लिए अलाव या लकड़ी का इंतजाम किया जाए। पुराने लेकिन उपयोगी कंबल, जैकेट और गर्म कपड़े दान किए जाएं, क्योंकि ये किसी की जान बचा सकते हैं। साथ ही, यदि संभव हो तो ठिठुरते राहगीरों को गर्म चाय या भोजन उपलब्ध कराया जाए। खुले में सो रहे लोगों को पास के रैन बसेरों या सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में भी सहयोग करने की जरूरत है।
“सच्ची इबादत वही है, जो किसी मजबूर के काम आए।”
कड़ाके की ठंड के इस दौर में जरूरत है कि सभी लोग मिलकर जिम्मेदार नागरिक का फर्ज निभाएं, ताकि सहसवान और आसपास के इलाकों में कोई भी व्यक्ति सर्दी की मार से बेबस न रहे।
Budaun Amarprabhat